प्रयागराज माघ मेला 2027: महाकुंभ जैसी तैयारी, रिंग रेल और टॉय ट्रेन बढ़ाएंगे चमक

KhabarCentral10 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
प्रयागराज माघ मेला 2027: महाकुंभ जैसी तैयारी, रिंग रेल और टॉय ट्रेन बढ़ाएंगे चमक

संगम नगरी प्रयागराज एक बार फिर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के स्वागत के लिए तैयार हो रही है। साल 2027 में होने वाले प्रयागराज माघ मेला 2027 के लिए प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। इस बार की तैयारी इतनी व्यापक है कि इसे बिल्कुल महाकुंभ के स्तर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के तहत उत्तर मध्य रेलवे और मेला प्राधिकरण मिलकर एक ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार कर रहे हैं, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम और सुरक्षित हो सके।

यह मेला 15 जनवरी से 6 मार्च 2027 तक चलेगा, जिसमें मकर संक्रांति का शाही स्नान मुख्य आकर्षण होगा और महाशिवरात्रि के साथ इसका समापन होगा। लगभग 50 से 52 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के लिए मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रजनीश अग्रवाल ने बताया कि शहर के नौ रेलवे स्टेशनों से विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक खास 'कलर-कोडेड' सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे यात्रियों को शेल्टर और टिकटों की पहचान करने में आसानी होगी।

श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और आधुनिक सुविधाएं

इस बार का मेला केवल आस्था तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें आधुनिकता का तड़का भी लगेगा। प्रशासन की योजना के अनुसार:

  • रिंग रेल सेवा: प्रयागराज को अयोध्या और काशी से जोड़ने के लिए एक रिंग रेल सेवा शुरू की जाएगी।
  • टॉय ट्रेन: मेला क्षेत्र के भीतर श्रद्धालुओं के घूमने के लिए एक टॉय ट्रेन चलाई जाएगी।
  • ज्योतिर्लिंग दर्शन: अराइल क्षेत्र में संगम तट पर 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां स्थापित की जाएंगी।
  • अन्य सुविधाएं: वेलनेस और योग केंद्र, थीम आधारित लाइटिंग और धार्मिक सेल्फी पॉइंट्स बनाए जाएंगे।

तैयारियों की समयसीमा तय करते हुए मंडल आयुक्त डॉ. लोकेश एम. ने निर्देश दिया है कि बिजली, पानी, सड़क और स्वच्छता से जुड़े सभी काम 15 अक्टूबर तक शुरू हो जाने चाहिए और 20 दिसंबर तक पूरे कर लिए जाएं। पूरे मेला क्षेत्र को आठ सेक्टरों में बांटा गया है, जहां आवाजाही के लिए नौ पंटून पुल बनाए जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से महाकुंभ की तर्ज पर 'सिंगल एंट्री और एग्जिट' पॉइंट बनाए जाएंगे ताकि भीड़ का प्रबंधन सही ढंग से हो सके।

एक खास बात यह भी है कि इस आयोजन के दौरान अखिल भारतीय दांडी संन्यासी परिषद पहली बार विशेष 'देव अमृत स्नान' आयोजित करेगा, जो इस मेले के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा देगा।

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