प्रतापगढ़: पुलिस और श्रम विभाग की बड़ी कार्रवाई, सात बाल श्रमिक मुक्त
प्रतापगढ़ में पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त छापेमारी में सात बच्चों को बाल श्रम से बचाया गया। मालिकों को नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में मासूमों के बचपन को बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHT) और श्रम प्रवर्तन विभाग ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर सात बाल श्रमिकों को उनके शोषण से मुक्त कराया है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक दीपक भुकर के निर्देश और अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) बृजनंदन राय की देखरेख में अंजाम दी गई।
शनिवार, 24 अक्टूबर को श्रम प्रवर्तन अधिकारी महेंद्र सिंह और AHT पुलिस की टीम ने कोतवाली नगर और कोतवाली देहात इलाकों में सघन छापेमारी की। टीम ने शहर के विभिन्न होटलों, ढाबों, गैरेज और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की जांच की, जहां बच्चों से काम कराए जाने की आशंका थी। इस दौरान सात बच्चों को काम करते हुए पाया गया, जिन्हें तुरंत वहां से रेस्क्यू किया गया।
दुकानदारों को नोटिस और जागरूकता अभियान
बच्चों को मुक्त कराने के बाद श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने उन मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है, जो इन बच्चों से मजदूरी करा रहे थे। विभाग अब इन नियोक्ताओं के खिलाफ औपचारिक कानूनी प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इस टीम में AHT स्टेशन हाउस ऑफिसर संजय सिंह यादव, सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र राम और कांस्टेबल प्रदीप कुमार व आलोक कुमार शामिल रहे।
छापेमारी के साथ-साथ टीम ने आम जनता के बीच जागरूकता फैलाने का भी काम किया। अधिकारियों ने लोगों को बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, बच्चों से भीख मंगवाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खतरों के प्रति आगाह किया।
इतना ही नहीं, टीम ने 'एक युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। साथ ही, COTPA एक्ट-2003 का सख्ती से पालन कराते हुए शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए। प्रतापगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और नशा मुक्ति के लिए इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।