प्रतापगढ़ पुलिस का बड़ा एक्शन: 500 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, 53 गिरफ्तार
प्रतापगढ़ पुलिस ने 19 राज्यों में फैले 500 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर 53 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जानें कैसे होता था खेल।

उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ पुलिस ने एक ऐसी बड़ी कामयाबी हासिल की है जिसने देशभर के साइबर अपराधियों के होश उड़ा दिए हैं। पुलिस ने एक ऐसे शातिर प्रतापगढ़ साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने भारत के करीब 19 राज्यों के लोगों को अपना शिकार बनाया और लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी की। इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने कुंडा, रानीगंज और देहात कोतवाली इलाकों में छापेमारी कर कुल 53 आरोपियों को दबोचा है।
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। ठगी का तरीका यह था कि जालसाज लोगों को फोन करते थे और खुद को सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी बताते थे। वे लोगों को झांसा देते थे कि उनका 'किसान सम्मान निधि' खाता अपडेट करना है या केवाईसी (KYC) वेरिफिकेशन बाकी है। जैसे ही मासूम लोग उनकी बातों में आकर अपनी बैंकिंग डिटेल्स साझा करते, अपराधी पलक झपकते ही उनके खातों से पैसे साफ कर देते थे।
बेरोजगार युवाओं के खातों का किया गलत इस्तेमाल
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट खास तौर पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था। गिरोह के सदस्य इन युवाओं के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे या फिर उनके मौजूदा खातों को किराए पर लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता था, ताकि पुलिस तक असली मास्टरमाइंड न पहुंच सके।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और अप्रैल महीने से ही करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामलों में इनका हाथ रहा है। एएसपी ईस्ट आलोक कुमार भाटी ने पुष्टि की है कि पुलिस अब गिरफ्तार किए गए 53 संदिग्धों से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस का मकसद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य साथियों का पता लगाना और उन सभी बैंक खातों की मैपिंग करना है, जिनके जरिए पैसों का हेरफेर किया गया। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।