वाराणसी में डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज का जायजा लेंगे पीएम मोदी, कई बड़े प्रोजेक्ट्स की होगी समीक्षा
पीएम मोदी रविवार को वाराणसी के डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस शहर की बदलती तस्वीर और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स पर रहेगा। पीएम मोदी विशेष रूप से महत्वाकांक्षी वाराणसी डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण कार्य का ऑन-साइट निरीक्षण करेंगे। यह दौरा उनके केदारनाथ (उत्तराखंड) प्रवास का हिस्सा है, जिसके बाद वह काशी पहुंचेंगे।
प्रधानमंत्री केवल पुल का ही नहीं, बल्कि शहर की नई अर्बन रोपवे परियोजना और काशी रेलवे स्टेशन के व्यापक पुनर्विकास कार्य की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। यह पूरा दौरा वाराणसी को एक आधुनिक और सुगम शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
139 साल पुराने पुल की जगह लेगा यह आधुनिक सिग्नेचर ब्रिज
यह डबल डेकर सिग्नेचर ब्रिज 139 साल पुराने मालवीय पुल की जगह लेगा और पीएम-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान का एक अहम हिस्सा है। यह पुल नमो घाट के पास गंगा नदी पर बनाया जा रहा है, जो वाराणसी को सीधे चंदौली से जोड़ेगा। इस पुल की खासियत इसकी बनावट है; इसके निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक होंगे (जो क्षमता के मामले में भारत में पहली बार होगा) और ऊपरी हिस्से में छह लेन का हाईवे होगा।
लगभग 2,642 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल की लंबाई एक किलोमीटर से अधिक है और इसे 150 साल की सर्विस लाइफ के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा वाराणसी से पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन के बीच ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलना होगा।
रणनीतिक रूप से यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वपूर्ण है। अनुमान है कि इस पुल के शुरू होने से सालाना करीब 8 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी, जिससे देश को हर साल लगभग 638 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिलेगा।
इस परियोजना को अक्टूबर 2024 में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली थी और वर्तमान में रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और GPT इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा साइट क्लियरिंग और पाइलिंग का काम शुरू कर दिया गया है। आधिकारिक तौर पर इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 2029 तक पूरी तरह तैयार हो सकता है। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुरक्षा और तैयारियों की कमान संभाले हुए हैं।