पीलीभीत: वोटर लिस्ट में बड़ी धांधली, दो SDM और कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR दर्ज
पीलीभीत में वोटर लिस्ट में बड़ी धांधली सामने आई है। 13 हजार से ज्यादा रिकॉर्ड्स में छेड़छाड़ के आरोप में दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर केस दर्ज हुआ है।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। 127-पीलीभीत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त एक्शन लिया है। इस मामले में दो उप-जिलाधिकारियों (SDM) और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पूरा मामला तब खुला जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वोटर आईडी कार्ड में विसंगतियों की शिकायत की। इसके बाद जब जांच हुई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सहायक चुनाव अधिकारी के.के. कश्यप की शिकायत पर सदर कोतवाली थाने में 22 अक्टूबर 2026 को औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई। जिला मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने इस कानूनी कार्रवाई की पुष्टि की है।
13 हजार से ज्यादा रिकॉर्ड्स में हुई छेड़छाड़
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के निर्देश पर हुई जांच में पता चला कि वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) के रिकॉर्ड्स में भारी हेरफेर किया गया था। जांच के मुताबिक, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच 13,779 फॉर्म-8 आवेदन प्रोसेस किए गए, लेकिन इनके कोई भौतिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दी गई और 3,309 को खारिज कर दिया गया।
राजनीतिक दावों के अनुसार, करीब 16,554 वोटों पर असर पड़ा है। आरोप है कि 804 वैध मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए, जबकि 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ दिए गए जो वहां के निवासी ही नहीं हैं। साथ ही, मौजूदा EPIC आईडी में व्यवस्थित तरीके से नाम बदलने का खेल भी खेला गया।
इस धांधली के जिम्मेदार पीलीभीत के पुरनपुर SDM मयंक गोस्वामी, अमरिया SDM हेमंत चौधरी और VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को माना गया है। दोनों SDM को उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इन तीनों पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस घटना के बाद हड़कंप मच गया है, जिसके चलते मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे उत्तर प्रदेश के जिला निर्वाचन अधिकारियों को विधानसभा वोटर लिस्ट का ऑडिट करने और दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और कांग्रेस नेताओं ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कड़ी निंदा की है और मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की है।