पीलीभीत: वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी, चुनाव आयोग ने दो SDMs को किया सस्पेंड

चुनाव आयोग ने पीलीभीत के दो एसडीएम को वोटर लिस्ट में भारी अनियमितताओं के कारण सस्पेंड करने का आदेश दिया है। जानें पूरा मामला।

Sushant Singh1 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
पीलीभीत: वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी, चुनाव आयोग ने दो SDMs को किया सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में भारी अनियमितताएं पाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के दो उप-जिलाधिकारियों (SDM), मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब जांच में वोटर लिस्ट के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और दस्तावेजों के गायब होने की बात सामने आई।

मामला पीलीभीत की विधानसभा संख्या 127 का है, जहां निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) के तौर पर तैनात इन दोनों अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। जांच में पता चला कि 31 मई से 29 अगस्त के बीच वोटर डिटेल्स में बदलाव के लिए फॉर्म-8 के जरिए 13,779 आवेदन दिए गए थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दी गई और 3,309 को खारिज कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आवेदनों से जुड़े फिजिकल फॉर्म और जरूरी दस्तावेज दफ्तर से गायब मिले।

राजनीतिक दलों की शिकायत के बाद खुला राज

इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे राजनीतिक दलों ने औपचारिक रूप से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की शिकायत की। मतदाताओं ने आरोप लगाया था कि उनके नाम और पिता के नाम बिना किसी अनुमति के बदल दिए गए हैं, जबकि कई वैध नामों को सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है।

चुनाव आयोग ने अब न केवल इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने का आदेश दिया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बिना इन्हें दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा। इस मामले में शहर कोतवाली पुलिस स्टेशन में दोनों एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार को जारी सरकारी ट्रांसफर लिस्ट में हेमंत चौधरी को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मयंक गोस्वामी को लखनऊ में बंदोबस्त अधिकारी नियुक्त किया गया था। लेकिन शनिवार को प्रशासन ने उन्हें नई पोस्टिंग पर भेजने के बजाय वेटलिस्ट में डाल दिया और अब चुनाव आयोग के आदेश के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

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