पीलीभीत सपा में घमासान: मुस्लिम समुदाय पर टिप्पणी को लेकर आपस में भिड़े दिग्गज
पीलीभीत की बिसलपुर सीट पर समाजवादी पार्टी में रार मची है। मुस्लिम समुदाय पर अपमानजनक टिप्पणी के आरोपों ने पार्टी को दो गुटों में बांट दिया है।

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पीलीभीत की बिसलपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के भीतर जबरदस्त अंदरूनी कलह शुरू हो गई है। पार्टी के दो गुटों के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि अब यह सरेआम जुबानी जंग में बदल चुका है। मामला मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर की गई अपमानजनक टिप्पणी और शहर अध्यक्ष को पद से हटाने से जुड़ा है, जिसने पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत पूर्व शहर अध्यक्ष तंजीव रजा और लोहिया वाहिनी के विधानसभा अध्यक्ष दुष्यंत गंगवार के बीच टकराव से हुई। तंजीव रजा का आरोप है कि दुष्यंत गंगवार ने एक बातचीत के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रति बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। रजा का दावा है कि जब उन्होंने इस बात का विरोध किया, तो गंगवार पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही शहर अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया।
जिला अध्यक्ष पर नाराजगी और काले झंडे की चेतावनी
तंजीव रजा ने इस पूरे मामले में जिला अध्यक्ष धर्मेश गंगवार की भूमिका की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दुष्यंत गंगवार के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह और मुस्लिम समुदाय के लोग जिला अध्यक्ष को काले झंडे दिखाएंगे। इतना ही नहीं, रजा ने यह धमकी भी दी है कि शहर कार्यकारिणी समिति के सदस्य सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं।
दूसरी ओर, दुष्यंत गंगवार ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा बताया है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि तंजीव रजा लंबे समय से पार्टी के कार्यक्रमों में निष्क्रिय थे और शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान उन्होंने संगठन का साथ नहीं दिया। गंगवार ने आरोप लगाया कि रजा सोशल मीडिया पर अनुचित सामग्री पोस्ट कर रहे थे और उनकी निष्क्रियता के कारण ही पार्टी ने उन्हें हटाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है और उनका समर्थन हमेशा बना हुआ है।
पार्टी ने अब बालीउल्लाह को नया शहर अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। दुष्यंत गंगवार का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को लोहिया वाहिनी में भी जगह दी गई है। हालांकि, पार्टी के भीतर मची यह रार और सार्वजनिक रूप से हो रही यह लड़ाई आने वाले विधानसभा चुनावों में सपा के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।