पीलीभीत: बिसलपुर मंडी में मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नियुक्ति पर बवाल, सरकारी नीति उल्लंघन का आरोप

पीलीभीत की बिसलपुर मंडी में मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नियुक्ति पर उठे सवाल, सरकारी खरीद नीति के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोप।

Sushant Singh22 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
पीलीभीत: बिसलपुर मंडी में मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नियुक्ति पर बवाल, सरकारी नीति उल्लंघन का आरोप

उत्तर प्रदेश के बरेली मंडल में धान की खरीद प्रक्रिया एक बड़े विवाद में घिर गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कर्मचारियों की तैनाती को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामला पीलीभीत जिले की बिसलपुर मंडी का है, जहां एक मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नियुक्ति ने सरकारी खरीद नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरा मामला मार्केटिंग इंस्पेक्टर श्याम बहादुर दुबे की तैनाती से जुड़ा है। आरोप है कि उन्हें बिसलपुर मंडी में खरीद केंद्र का प्रभारी बनाया गया है, जो सीधे तौर पर राज्य सरकार की खरीद नीति का उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि श्याम बहादुर दुबे पिछले नौ वर्षों से इसी जिले में तैनात हैं, जिसमें आठ साल उन्होंने बिसलपुर मंडी और एक साल पूरनपुर मंडी में बिताए हैं। हालांकि, पिछले साल उनका तबादला लखनऊ कर दिया गया था, लेकिन वर्तमान धान खरीद सीजन के दौरान उन्हें दोबारा बरेली मंडल से संबद्ध कर दिया गया।

नियमों को ताक पर रखकर की गई तैनाती?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरएमओ बरेली, राजेश उपाध्याय ने नियमों की अनदेखी करते हुए दुबे को बिसलपुर में तैनात किया। सरकारी खरीद नीति के क्लॉज 7.6 में स्पष्ट लिखा है कि यदि कोई मार्केटिंग इंस्पेक्टर पिछले वर्ष किसी विशेष मंडी या खरीद केंद्र पर तैनात रहा है, तो उसे अगले वित्तीय वर्ष या सत्र में उसी स्थान पर दोबारा नियुक्त नहीं किया जा सकता।

इस मामले में अब भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप भी सामने आने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि खरीद सीजन के दौरान नियमों को दरकिनार कर 'लुभावनी' पोस्टिंग पाने के लिए बड़े स्तर पर आर्थिक लेन-देन किया जाता है। संवेदनशील मंडियों में एक ही अधिकारी की बार-बार तैनाती ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

अब इस पूरे मामले में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है। यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और बरेली के जिलाधिकारी की नजरों से यह अनियमितता कैसे बच गई।

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