सीएम योगी के पीलीभीत दौरे पर बवाल, कई नेताओं की नजरबंदी से बढ़ा तनाव
सीएम योगी के पीलीभीत दौरे के दौरान हिंदू महासभा और कांग्रेस नेताओं को नजरबंद किए जाने पर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पीलीभीत दौरे ने शहर में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। नेउरानपुर में आयोजित एक रामकथा कार्यक्रम में सीएम की मौजूदगी के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर कई हिंदू संगठनों के सदस्यों और कांग्रेस नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई के बाद अब इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विपक्षी दलों के साथ-साथ सहयोगी संगठनों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अपनों से ही नाराजगी और विपक्ष के आरोप
इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाली प्रतिक्रिया हिंदू महासभा की ओर से आई है। संगठन के नेताओं का कहना है कि वे भाजपा का समर्थन करते हैं, इसके बावजूद उनके साथ पुलिस का व्यवहार बेहद निराशाजनक रहा। हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने सवाल उठाया कि अगर सरकार के अपने ही समर्थक कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया जाएगा, तो वे जनता की समस्याएं प्रशासन तक कैसे पहुंचाएंगे। वहीं, जिला अध्यक्ष पंडित पंकज शर्मा ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित बताते हुए चेतावनी दी है कि इस मुद्दे पर जल्द ही जवाब दिया जाएगा। संगठन ने अपनी नाराजगी जताने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात भी की है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस कदम को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट हेमंत मिश्रा का आरोप है कि शहर अध्यक्ष श्रीकृष्ण गंगवार, छात्र कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेश वर्मा और जिला महासचिव मोहम्मद अजीम को बिना किसी लिखित आदेश के नजरबंद किया गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की तैनाती इतनी सख्त थी कि शहर अध्यक्ष के घर पर तब भी पुलिस तैनात रही जब वे वहां मौजूद ही नहीं थे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार विरोध की हर आवाज को दबाना चाहती है और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे इस दमनकारी नीति के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक विरोध जारी रखेंगे।