यूपी में भाजपा को रोकने के लिए ओवैसी का दांव, विपक्षी गठबंधन के लिए बढ़ाया हाथ

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी में भाजपा को रोकने के लिए ओवैसी का दांव, विपक्षी गठबंधन के लिए बढ़ाया हाथ

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई है। ओवैसी का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी के बीच आया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

ओवैसी ने साफ तौर पर कहा कि अगर अन्य विपक्षी दलों का लक्ष्य भी भाजपा को सत्ता से बाहर करना है, तो वे AIMIM के साथ हाथ मिला सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिशा में बातचीत का दौर जारी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन के लिए उनकी कुछ शर्तें हैं, जिन्हें उन्होंने जून 2026 में ही रख दिया था। ओवैसी का मानना है कि गठबंधन में सभी साझेदारों को समान दर्जा मिलना चाहिए और एक-दूसरे के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।

अखिलेश यादव पर निशाना और गठबंधन की शर्तें

बातचीत के दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी का 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विरोध करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ओवैसी ने पहले गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर की समयसीमा तय की थी, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि चर्चाएं अभी भी चल रही हैं और किसी नतीजे पर पहुंचने के बाद ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

चुनावों की तैयारी के साथ-साथ ओवैसी ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है। उनका दावा है कि पिछले तीन महीनों से केवल उनकी पार्टी ही इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले में AIMIM ने एक रिव्यू पिटीशन दाखिल की है।

ओवैसी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी का अभियान पहले ही शुरू कर दिया है। उनका मुख्य राजनीतिक लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को एक और जनादेश मिलने से रोकना है। अब देखना यह होगा कि क्या अन्य विपक्षी दल ओवैसी की शर्तों को मानते हुए उनके साथ आने को तैयार होते हैं या नहीं।

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