यूपी में मुस्लिम नेतृत्व की वकालत, ओवैसी ने भाजपा और सपा को दी सीधी चुनौती
असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के मुसलमानों को वोट बैंक बनने के बजाय खुद नेता बनने की सलाह दी और सपा-भाजपा पर निशाना साधा।

तेलंगाना के हैदराबाद में एक संबोधन के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को अब सिर्फ 'वोट बैंक' बनकर रहने के बजाय खुद राजनीतिक नेतृत्व संभालना चाहिए और lawmaker (विधायक/सांसद) बनना चाहिए।
ओवैसी ने समुदाय को प्रेरित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उदाहरण का सहारा लिया। उन्होंने अमेरिका के मिशिगन में अब्दुल एल-सय्यद की सफलता का जिक्र किया, जो 2026 के मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बने। ओवैसी ने कहा कि यूपी के 'अब्दुलों' को भी इसी तरह की मिसाल पेश करनी होगी ताकि उन रूढ़ियों को तोड़ा जा सके जो भारतीय राजनीति में लंबे समय से चली आ रही हैं।
वोट बैंक की राजनीति और 'हिस्सेदारी' की मांग
सपा और भाजपा पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय ने हमेशा अन्य पार्टियों के लिए 'कालीन बिछाने' (सहयोगी बनने) का काम किया है, लेकिन बदले में उन्हें वह सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि लगातार चुनावी समर्थन मिलने के बावजूद सपा मुसलमानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने में विफल रही है। वहीं, भाजपा पर उन्होंने आपत्तिजनक बयानबाजी करने का आरोप लगाया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब AIMIM 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है। ओवैसी की पूरी रणनीति अब 'हिस्सेदारी' के इर्द-गिर्द घूम रही है। उनका स्पष्ट मानना है कि मुसलमानों को सत्ता की संरचनाओं में केवल मूक सहभागी नहीं, बल्कि अधिकार रखने वाले पदों पर बैठना चाहिए।