कैराना में ओवैसी का अखिलेश यादव पर पलटवार, 'रावण' वाले बयान पर उठाए सवाल
कैराना में ओवैसी ने अखिलेश यादव के 'रावण' वाले बयान पर पलटवार किया और सपा पर मुस्लिमों को केवल वोट बैंक समझने का आरोप लगाया।

शामली जिले के कैराना में एक जनसभा के दौरान एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके परिवार पर तीखा हमला बोला है। दरअसल, यह पूरा विवाद अखिलेश यादव के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने ओवैसी की तुलना 'रावण' से की थी। ओवैसी ने इस तुलना को सिरे से खारिज करते हुए अखिलेश यादव की हिम्मत पर सवाल उठाए हैं।
ओवैसी ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या अखिलेश यादव में इतनी हिम्मत है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'रावण' कह सकें? उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश की नजर में हर वह मुस्लिम जो दाढ़ी और टोपी पहनता है, वह 'रावण' बन जाता है। ओवैसी ने सपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम समुदाय को सिर्फ एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है, लेकिन जब मुजफ्फरनगर और कैराना दंगों के पीड़ितों को मदद की जरूरत थी, तब सपा उनके साथ खड़ी नहीं दिखी।
सपा को बताया 'समाजवादी यादव परिवार'
राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर ओवैसी ने सपा को घेरते हुए कहा कि आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद जैसी सीटें, जहां से कभी मुस्लिम सांसद चुनकर लोकसभा जाते थे, अब वहां अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य बैठे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए सुझाव दिया कि समाजवादी पार्टी को अपना नाम बदलकर 'समाजवादी यादव परिवार' पार्टी रख लेना चाहिए। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि जब तक 'अब्दुल' खुद नेता नहीं बनेगा, तब तक मुसलमानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
हालांकि, इस तीखी नोकझोंक के बीच ओवैसी ने एक बड़ा संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा को रोकने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य लक्ष्य योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से रोकना है। इससे पहले एआईएमआईएम प्रवक्ता शादाब चौहान ने भी दावा किया था कि अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात ओवैसी के डर की वजह से हुई थी, ताकि उनकी राजनीतिक चालों का पर्दाफाश न हो जाए।