बांदा: प्रजापति समाज की रैली में गरजे ओम प्रकाश राजभर, सपा विधायक को दी खुली चुनौती

बांदा में प्रजापति समाज की रैली में ओम प्रकाश राजभर ने सपा विधायक को ललकारा और पिछड़ों के हक के लिए आरक्षण की मांग दोहराई।

Sushant Singh2 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
बांदा: प्रजापति समाज की रैली में गरजे ओम प्रकाश राजभर, सपा विधायक को दी खुली चुनौती

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से सियासी हलचल तेज कर दी है। सोमवार को बांदा के कृषि उत्पादन मंडी समिति मैदान में आयोजित 'प्रजापति समाज जन अधिकार महारैली' के दौरान राजभर ने समाजवादी पार्टी के विधायक को खुलेआम चुनौती दे डाली। उन्होंने विधायक से सामने आकर यह जवाब देने को कहा कि गरीबों के इलाज के लिए आवंटित फंड आखिर कहां गायब हो गया।

रैली को संबोधित करते हुए राजभर ने केवल सपा ही नहीं, बल्कि बसपा और कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पार्टियों की पिछली सरकारों ने हमेशा गरीबों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कुचला है। राजभर ने दावा किया कि अब जनता राजनीतिक रूप से जागरूक हो चुकी है और अब चुनाव धमकियों से नहीं, बल्कि सम्मान देने से जीते जाएंगे।

आरक्षण के मुद्दे पर फिर जताया कड़ा रुख

इस दौरान ओम प्रकाश राजभर ने पिछड़ों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के समान वितरण की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने याद दिलाया कि इस मुद्दे पर वह पहले भी इस्तीफा देने की चेतावनी दे चुके हैं और समाज के हक के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

वहीं, भागीदारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रजापति, जिनकी अध्यक्षता में यह रैली आयोजित की गई थी, ने बुंदेलखंड में प्रजापति समाज की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि बुंदेलखंड क्षेत्र की आबादी में इस समाज की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत से अधिक है, लेकिन राजनीतिक दलों ने उन्हें हमेशा नजरअंदाज किया है। प्रेमचंद प्रजापति ने बबेरू में समाज के लोगों के साथ हुए कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाते हुए घोषणा की कि 15 दिसंबर को बांदा जिला मुख्यालय पर एक विशाल विरोध रैली निकाली जाएगी।

इस महारैली में महेश चंद्र, बृजलाल प्रजापति, मेजर अछेलाल, केशव प्रसाद प्रजापति और सुधीर प्रजापति समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग और पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार से अपने अधिकारों की मांग की।

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