अंबेडकर नगर में राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, बताया 'डूबता जहाज'
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को 'डूबता जहाज' बताया और सपा के PDA फॉर्मूले पर उठाए गंभीर सवाल।
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अंबेडकर नगर के अपने दौरे के दौरान राजभर ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सपा को एक 'डूबता हुआ जहाज' करार दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि भविष्य में समाजवादी पार्टी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की कोई संभावना नहीं है और केवल वही लोग सपा से जुड़ेंगे जिनका राजनीतिक जीवन समाप्त होने वाला है।
राजभर ने पुरवांचल की राजनीति पर दावा करते हुए कहा कि 29 नवंबर 2026 को होने वाली एक रैली के बाद इस क्षेत्र से समाजवादी पार्टी का पूरी तरह सफाया हो जाएगा। पुरानी कड़वाहटों को याद करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने अतीत में उनकी पहचान पर सवाल उठाए थे और उन्हें महज '10 रुपये' की कीमत दी थी। राजभर के मुताबिक, अखिलेश यादव अब इस तरह की बयानबाजी इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है।
PDA फॉर्मूले और धार्मिक आस्था पर उठाए सवाल
5 नवंबर 2026 को अंबेडकर नगर दौरे के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव की धार्मिक निष्ठा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सपा प्रमुख को चुनौती दी कि अगर वे भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा साबित करना चाहते हैं, तो मथुरा का दौरा करें। इसके अलावा, उन्होंने सपा के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए 'D' (दलित) का अर्थ उन्हें दूर रखना है। राजभर ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने कभी भी हाशिए पर रहने वाले लोगों के साथ वास्तविक जुड़ाव नहीं बनाया और उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों को देखने की सलाह दी।
इतना ही नहीं, राजभर ने अखिलेश यादव के उस बयान का भी मजाक उड़ाया जिसमें उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कही थी। राजभर ने सवाल किया कि कोई नेता चुनावी प्रक्रिया से इस तरह कैसे पीछे हट सकता है। साथ ही, काशी के विकास को लेकर अखिलेश यादव के दावों को खारिज करते हुए राजभर ने कहा कि काशी की अनदेखी की बातें गलत हैं और वहां मेट्रो चलाने का वादा पूरी तरह निराधार है।