नोएडा: अर्बन कंपनी गिग वर्कर्स का विरोध, 6 महीने बाद भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
नोएडा: अर्बन कंपनी गिग वर्कर्स का विरोध, 6 महीने बाद भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

नोएडा के सेक्टर 60 में एक ट्रेनिंग सेंटर के बाहर जब अप्रैल 2026 में अर्बन कंपनी के करीब 40 गिग वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी, तो उम्मीद थी कि उनकी जिंदगी में बदलाव आएगा। लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत यह है कि इन कामगारों की कई बुनियादी जरूरतें आज भी अधूरी हैं। सोनाक्षी, नेहा देवी और पिंकी देवी जैसे कई वर्कर्स आज भी उन्हीं बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिनके लिए उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला किया था।

वर्कर्स की मुख्य मांगें आठ घंटे का तय कार्यदिवस, साप्ताहिक अवकाश और सबसे जरूरी—साफ पीने का पानी और वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाएं थीं। अक्टूबर 2026 तक की समीक्षा बताती है कि कंपनी ने कुछ कदम तो उठाए हैं, लेकिन वे नाकाफी हैं। अर्बन कंपनी ने महीने में चार दिन की छुट्टी, मेडिकल इंश्योरेंस और सर्विस बुकिंग के बीच यात्रा की दूरी कम करने जैसे बदलाव किए हैं। हालांकि, सबसे बड़ी समस्या महिलाओं के लिए बनी हुई है, जिन्हें काम के दौरान सार्वजनिक शौचालयों और सुरक्षित विश्राम स्थलों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, काम के तय घंटों की मांग को अब तक अनसुना किया गया है, जिससे वर्कर्स का शेड्यूल अनिश्चित बना रहता है। हालात इतने चुनौतीपूर्ण रहे कि कुछ वर्कर्स ने तो इस पेशे को पूरी तरह छोड़ने का फैसला कर लिया है।

नोएडा में बढ़ता श्रम असंतोष और सरकारी दावे

नोएडा में केवल अर्बन कंपनी ही नहीं, बल्कि जोमैटो, स्विगी, जेप्टो और ब्लिंकिट के डिलीवरी राइडर्स के साथ-साथ आशा वर्कर्स भी बेहतर सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2026 में अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम मासिक वेतन को 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये किया, वहीं बुनियादी ढांचे की समस्या जस की तस बनी हुई है। नोएडा अथॉरिटी ने अप्रैल में दावा किया था कि टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय दो हफ्ते में खोल दिए जाएंगे, लेकिन वर्कर्स के अनुभव कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कानूनी मोर्चे पर भी उथल-पुथल रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत को रद्द करते हुए जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम की आलोचना की, हालांकि सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। इस बीच, IFAT और CaRWAN जैसे संगठन और राघव चड्ढा जैसे नेताओं ने इन डिलीवरी राइडर्स और गिग वर्कर्स के संघर्ष को उजागर किया है, लेकिन अर्बन कंपनी ने इन तमाम मुद्दों पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।

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