नोएडा कमर्शियल रियल एस्टेट में आएगी बड़ी तेजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी खोलेंगे तरक्की के रास्ते

अगर आप नोएडा के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट पर नजर रख रहे हैं, तो आने वाला समय बेहद रोमांचक होने वाला है। बुनियादी ढांचे में जबरदस्त सुधार और कॉर्पोरेट डिमांड में बढ़ोतरी के चलते नोएडा कमर्शियल रियल एस्टेट अब विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। क्षेत्र के अनुभवी रियल एस्टेट कंसल्टेंट और आदिनाथ उर होम्स के सीईओ गौरव जैन का मानना है कि कनेक्टिविटी में सुधार और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कमर्शियल फ्लाइट्स की शुरुआत से बाजार को नई ऊर्जा मिली है।
इस विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए नोएडा अथॉरिटी ने 'न्यू नोएडा' प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया है। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्ण करुणेश के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि साल 2030 तक यहां लगभग 6 लाख रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं। इसके लिए लॉजिस्टिक्स, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल सेक्टर में करीब 35,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है।
कॉर्पोरेट हब बनेगा क्षेत्र, निवेश के खुलेंगे नए द्वार
बाजार की इस तेजी को देखते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने सेक्टर 22ई में ई-नीलामी के जरिए कॉर्पोरेट प्लॉट का आवंटन शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य की ऑफिस जरूरतों को पूरा किया जा सके। दिल्ली-एनसीआर में प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी और कमर्शियल लीजिंग की बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र एक बड़े बिजनेस हब में तब्दील हो रहा है।
क्षेत्र की इस तरक्की में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का विस्तार और मेट्रो प्रोजेक्ट्स की अहम भूमिका रही है, जिससे पहुंच आसान हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट' किए जाने के बाद इस क्षेत्र की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है। सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कमर्शियल स्पेस के अवशोषण (absorption) में भारी उछाल देखा गया है, जो निवेशकों और कंपनियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।