खारी नदी विवाद: याचिकाकर्ता को मिली धमकी, NGT ने आगरा पुलिस को सुरक्षा देने का आदेश दिया

उत्तर प्रदेश के आगरा में खारी नदी के डूब क्षेत्र (floodplain) में हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक व्यक्ति और उनके परिवार को अब पुलिस सुरक्षा मिलेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आगरा के पुलिस कमिश्नर को याचिकाकर्ता और उनके दो परिवारजनों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश तब आया जब याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में शामिल बिल्डरों और ठेकेदारों ने उन्हें डराने-धमकाने और केस वापस लेने के लिए पैसों का लालच दिया है।
पूरा मामला देवशिश भट्टाचार्य नाम के व्यक्ति से जुड़ा है, जिन्होंने खारी नदी के किनारे हो रहे स्थायी निर्माणों को लेकर ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था। एनजीटी ने इससे पहले 21 अगस्त को इस मामले में नोटिस जारी कर अधिकारियों को निर्देश दिया था कि नदी के किनारे कोई भी अवैध निर्माण न होने दिया जाए। लेकिन इसके बाद याचिकाकर्ता का दावा है कि उन्हें गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
पैसों का लालच और परिवार में दहशत
याचिकाकर्ता के अनुसार, 13 अक्टूबर को तीन लोग, जो खुद को निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार या बिल्डर बता रहे थे, उनके क्लिनिक और निवास स्थान पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने उन्हें केस वापस लेने के लिए पैसों की पेशकश की और इनकार करने पर धमकी दी। इस घटना के बाद देवशिश ने 14 अक्टूबर को आगरा के पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को ईमेल के जरिए सूचित किया था। उन्होंने ट्रिब्यूनल को यह भी बताया कि इस पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग उनके पास है, जिसे उन्होंने सबूत के तौर पर पेश किया है।
धमकियों के कारण याचिकाकर्ता के परिवार में काफी डर का माहौल है। आवेदन में बताया गया कि उनकी पत्नी, जो एक प्राइमरी स्कूल टीचर हैं, डर के मारे स्कूल नहीं जा पा रही हैं। साथ ही उन्होंने अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर अफरोज अहमद की बेंच ने अंतरिम राहत देते हुए सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल ने अब आगरा के पुलिस कमिश्नर और मंडलायुक्त को इस मामले में अतिरिक्त प्रतिवादी (respondents) के रूप में शामिल कर लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने सुरक्षा याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।