वाराणसी में नमो बुक फेस्टिवल का आयोजन, पीएम मोदी के 25 साल के सफर को किताबों के जरिए दिखाया गया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और उनके शासन के 25 गौरवशाली वर्षों का जश्न मनाने के लिए वाराणसी में 'नमो बुक फेस्टिवल' का आयोजन किया गया। रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शिरकत की। इस फेस्टिवल के जरिए पीएम मोदी के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को किताबों के माध्यम से दुनिया के सामने रखा गया है।
इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी ब्रेक के सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि पहले 12.5 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर और फिर लगभग उतने ही समय तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करना, लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक दुर्लभ उपलब्धि है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा उदाहरण मिले जहां कोई व्यक्ति इतने लंबे समय तक लगातार सत्ता के शीर्ष पर रहा हो।
किताबों में सिमटा 'प्रधान सेवक' का व्यक्तित्व
वाराणसी, जो पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है, वहां आयोजित इस फेस्टिवल में 500 से अधिक किताबें प्रदर्शित की गईं। ये किताबें प्रधानमंत्री के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को उजागर करती हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों को शामिल किया गया है:
- आरएसएस (संघ) से लेकर राजनीतिक जीवन तक का सफर।
- गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शासन सुधार।
- बच्चों और छात्रों के प्रति उनकी चिंताएं और शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण।
- भारत की विदेश नीति में आया बदलाव और आतंकवाद व रक्षा के प्रति नया नजरिया।
- 2047 तक 'विकसित भारत' का विजन और सरकार के बड़े फैसले।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में पीएम मोदी के बहुआयामी व्यक्तित्व के प्रति पूरी दुनिया में गहरी दिलचस्पी बढ़ी है, यही वजह है कि अलग-अलग लेखकों ने उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर किताबें लिखी हैं। उन्होंने इसे पीएम मोदी की कड़ी मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता का परिणाम बताया।
युवाओं के संदर्भ में बात करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी बेहद प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी है। पीएम मोदी के नेतृत्व में युवाओं के भीतर एक नई प्रेरणा जागी है और उन्हें विश्वास है कि भविष्य में उनके लिए अवसरों के नए द्वार खुलेंगे। यह फेस्टिवल उन सभी के लिए एक श्रद्धांजलि की तरह है जिन्होंने प्रधानमंत्री के 'प्रधान सेवक' बनने के सफर को करीब से देखा है।