मुजफ्फरनगर: 'फरजी' वेब सीरीज देख जाली नोट छापने वाला गिरोह पकड़ाया, 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने एक बड़े जाली नोट गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब पुलिस को मेरठ-करनाल हाईवे पर वाजिद होटल के पास कुछ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। इस मुजफ्फरनगर जाली नोट गिरोह के सदस्य फर्जी नोटों की छपाई और उन्हें बाजार में खपाने के काम में जुटे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सूरज कुमार राय ने 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरी कार्रवाई का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बुधना इंस्पेक्टर सुभाष अत्री के नेतृत्व में एक टीम ने छापेमारी की, जिसमें गिरोह के मास्टरमाइंड शुभम, महेंद्र और टीनू को दबोचा गया। शुभम मूल रूप से बागपत के खेकड़ा का रहने वाला है, लेकिन फिलहाल दिल्ली के नरेला में रह रहा था। वहीं महेंद्र उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल और टीनू दौलतपुर का निवासी है।
वेब सीरीज 'फरजी' और यूट्यूब से सीखा नोट छापना
पुलिस की पूछताछ में जो खुलासा हुआ वह हैरान करने वाला है। गिरोह के मास्टरमाइंड शुभम ने बताया कि वह मशहूर वेब सीरीज 'फरजी' देखने के बाद जाली नोट बनाने के लिए प्रेरित हुआ था। इसके बाद उसने यूट्यूब पर ट्यूटोरियल वीडियो देखकर नोट छापने की बारीकियां सीखीं और अपने नरेला स्थित फ्लैट को ही नोट छापने की फैक्ट्री बना लिया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से और शुभम के फ्लैट से कुल 5,26,500 रुपये के जाली नोट बरामद किए हैं, जो सभी 500 रुपये के मूल्यवर्ग के थे। इसके अलावा छापेमारी के दौरान निम्नलिखित सामान जब्त किया गया है:
- एक लैपटॉप और कलर प्रिंटर
- कॉटन पेपर और बटर पेपर
- रंगीन फॉयल के रोल और प्रिंटिंग फ्रेम
- विभिन्न रासायनिक एजेंट और मोबाइल फोन
जांच में पता चला है कि यह गिरोह जाली नोटों को कम कीमत पर अलग-अलग शहरों में बेचने की योजना बना रहा था। जिस दिन इनकी गिरफ्तारी हुई, वे बुधना इलाके में इन नोटों को खपाने की फिराक में थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य संपर्कों और सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।