मुजफ्फरनगर और दिल्ली में इस बार रावण के साथ जलेगा 'कॉकरोच' का पुतला

दशहरे का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इस साल मुजफ्फरनगर और दिल्ली में यह जश्न कुछ अलग अंदाज में मनाया जाएगा। पारंपरिक रूप से जलाए जाने वाले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ अब एक 'कॉकरोच' का पुतला भी फूंका जाएगा। यह अनोखा कदम समाज और देश की विभिन्न बुराइयों को खत्म करने के संदेश के तौर पर उठाया गया है।
मुजफ्फरनगर में श्री राम सेवा दल ने इस बार 15 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला तैयार करवाया है। रामलीला समिति की यह परंपरा रही है कि वे हर साल मुख्य पुतलों के अलावा एक अतिरिक्त पुतला जलाते हैं, जो किसी विशेष सामाजिक बुराई का प्रतीक होता है। इससे पहले भ्रष्टाचार, आतंकवाद और कोविड-19 जैसे पुतले जलाए जा चुके हैं। इस साल कॉकरोच का पुतला देश में अस्थिरता पैदा करने वाली ताकतों के विनाश का प्रतीक माना जा रहा है। यहाँ रावण का पुतला 60 फीट, कुंभकर्ण का 55 फीट और मेघनाद का 50 फीट ऊंचा बनाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए सिटी एसपी अमृत जैन ने नुमाइश ग्राउंड का निरीक्षण कर ट्रैफिक और फायर सेफ्टी के इंतजामों का जायजा लिया है।
दिल्ली के पीतमपुरा में स्वच्छता का संदेश
वहीं दिल्ली के पीतमपुरा में श्री केशव रामलीला कमेटी ने 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला जलाने की तैयारी की है। कमेटी के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल देवराहा के मुताबिक, यह पुतला गंदगी का प्रतीक है। इसका उद्देश्य 'स्वच्छ भारत' और 'स्वच्छ दिल्ली' अभियान को बढ़ावा देना और लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि इसे हालिया नीट (NEET) पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां कुछ संदर्भों में छात्रों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
दिल्ली के कार्यक्रम में पुतलों को जलाने का एक तय क्रम होगा। सबसे पहले कॉकरोच का पुतला फूंका जाएगा, जिसके बाद मेघनाद, कुंभकर्ण और अंत में रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।