मुजफ्फरनगर पुलिस का बड़ा एक्शन: 6 राज्यों में फैला नकली शराब का नेटवर्क ध्वस्त, 7 गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर पुलिस ने 6 राज्यों में फैले नकली शराब के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, 7 आरोपी गिरफ्तार और भारी मात्रा में सामान बरामद।

Shubham Singh26 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मुजफ्फरनगर पुलिस का बड़ा एक्शन: 6 राज्यों में फैला नकली शराब का नेटवर्क ध्वस्त, 7 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ब्रांडेड बोतलों के नाम पर लोगों को जहर परोस रहा था। मुजफ्फरनगर सिटी कोतवाली पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने एक संयुक्त अभियान चलाकर अंतरराज्यीय नकली शराब गिरोह के सदस्यों को दबोचा है। यह पूरा खेल रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को रामपुर तिराहा स्थित रेलवे लाइन ब्रिज के पास एक रूटीन चेकिंग के दौरान खुला, जहां पुलिस ने सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

पकड़े गए आरोपियों में दो लोग हरियाणा के पानीपत जिले के रहने वाले हैं। एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा ने बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। ये लोग हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे इलाकों से सस्ती शराब खरीदते थे, जिसकी कीमत करीब 2,250 रुपये होती थी। इसके बाद इस सस्ती शराब को प्रीमियम ब्रांड्स जैसे रेड लेबल, ब्लैक लेबल और जेमसन की खाली बोतलों में भरा जाता था।

कबाड़ की बोतलों से बना रहे थे 'प्रीमियम' ब्रांड

हैरानी की बात यह है कि गिरोह के सदस्य कबाड़ डीलरों से महंगी शराब की खाली बोतलें खरीदते थे। फिर प्रोफेशनल सीलिंग मशीन और नकली रैपर्स का इस्तेमाल कर उन्हें बिल्कुल असली जैसा लुक दिया जाता था। जिस बोतल की लागत महज 200-250 रुपये आती थी, उसे बाजार में असली बताकर 3,000 रुपये तक में बेचा जा रहा था।

पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सामान जब्त किया है, जिसमें शामिल हैं:

  • नकली शराब की 210 बोतलें और 99 खाली बोतलें।
  • 398 ढक्कन और चार नकली रैपर।
  • पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और 5 मोबाइल फोन।
  • तीन गाड़ियाँ: वैगनआर, स्विफ्ट डिजायर और टाटा नेक्सॉन।

जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का जाल केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि यह हरियाणा, बिहार, गुजरात, उत्तराखंड और दिल्ली समेत कुल छह राज्यों में फैला हुआ था। एसएसपी सूरज कुमार राय के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान का मकसद अवैध शराब के निर्माण और तस्करी पर लगाम लगाना था। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने न केवल ग्राहकों को धोखा दिया, बल्कि राज्य के आबकारी राजस्व को भी भारी चपत लगाई।

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