मिर्जापुर: SIR के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसान, SDM को सौंपा ज्ञापन
मिर्जापुर में संयुक्त किसान मोर्चा और BKU ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के विरोध में प्रदर्शन किया और CEC को हटाने की मांग की।

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में किसानों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन (BKU) के बैनर तले जुटे किसानों ने अपनी मांगों को लेकर चूनर तहसील मुख्यालय पर धावा बोला। इस दौरान किसानों ने जमकर नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) को सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष कंचन सिंह फौजी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों की मुख्य मांग है कि SIR की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की।
चुनावी सुधारों और वोटर लिस्ट से नाम कटने का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों का दावा है कि बिना किसी पारदर्शिता के करीब 13.41 करोड़ नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिन्हें तुरंत बहाल किया गया जाना चाहिए। कंचन सिंह फौजी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी संवैधानिक शपथ का उल्लंघन किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें संरक्षण दे रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने असली नागरिकों के नाम काटकर सत्ताधारी भाजपा को फायदा पहुँचाने की कोशिश की है।
किसानों ने ज्ञापन में यह भी मांग की कि 2023 के अधिनियम में संशोधन कर चयन पैनल से कैबिनेट मंत्रियों को हटाकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने चुनावी सुधारों की मांग करते हुए आनुपातिक प्रतिनिधित्व, धन और बाहुबल के प्रभाव को कम करने और चुनावों के लिए राज्य निधि के प्रावधान को कानूनी रूप से लागू करने की बात कही।
इस प्रदर्शन का हिस्सा बने किसानों ने स्पष्ट किया कि यह केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन है। उन्होंने इस मुद्दे पर विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं का भी समर्थन किया। ज्ञापन में यह जोर दिया गया कि नियमपुस्तकों में संशोधन करने का अधिकार केवल संसद को है, इसलिए संसद को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए ताकि इस संवैधानिक संकट को सुलझाया जा सके।