मेरठ: निजी अस्पताल में पूर्व प्रधान की मौत, परिजनों ने लगाया वसूली और लापरवाही का आरोप

मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान पूर्व ग्राम प्रधान की मौत। परिजनों ने लगाया 7 लाख की वसूली और इलाज में लापरवाही का आरोप।

Shubham Singh22 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मेरठ: निजी अस्पताल में पूर्व प्रधान की मौत, परिजनों ने लगाया वसूली और लापरवाही का आरोप

मेरठ के साकेत इलाके में स्थित एक निजी अस्पताल उस समय विवादों के केंद्र में आ गया, जब इलाज के दौरान एक पूर्व ग्राम प्रधान की मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ। परिजनों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर न केवल मोटी रकम वसूली, बल्कि मरीज की जान के साथ खिलवाड़ भी किया।

जानकारी के मुताबिक, हर्रा-खेरी के पूर्व ग्राम प्रधान तैयब चौहान (कार्यकाल 2005-2010) ब्रेन हेमरेज से जूझ रहे थे और साकेत के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए।

7 लाख की वसूली और घटिया दवाओं का आरोप

परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महज सात दिनों के भीतर अस्पताल ने उनसे 7 लाख रुपये वसूल लिए। उनका दावा है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने इलाज में घटिया दवाओं का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब वे अस्पताल की अतिरिक्त आर्थिक मांगों को पूरा नहीं कर पाए, तो अस्पताल ने इलाज देना लगभग बंद कर दिया, जिसके कारण तैयब चौहान की जान चली गई।

हंगामे की सूचना मिलते ही आरएलडी विधायक गुलाम मोहम्मद मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीओ सिविल लाइंस दीक्षा भौरिया भी अस्पताल पहुंचीं। पुलिस ने परिजनों की शिकायतों को दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

मेरठ में निजी अस्पतालों की मनमानी का यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में अजंता मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में एक गर्भवती महिला की मौत के बाद भी परिजनों ने अनावश्यक ब्लड और प्लाज्मा देने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा, निजी अस्पतालों द्वारा मेडिकल सप्लाई पर 400% से 1300% तक मुनाफा कमाने की खबरें भी सामने आई हैं। गौरतलब है कि साल 2024 में स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही और स्टाफ की कमी के चलते मेरठ के 13 निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए थे।

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