मेरठ ब्लू ड्रम मर्डर केस: मुस्कान और साहिल को अदालत ने सुनाई मौत की सजा

मेरठ की एक जिला अदालत ने शहर को दहला देने वाले 'ब्लू ड्रम मर्डर केस' में अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला सौरभ राजपूत की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
यह खौफनाक वारदात 3 मार्च 2025 की रात को मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में अंजाम दी गई थी। आरोपियों ने न केवल सौरभ राजपूत की हत्या की, बल्कि सबूत मिटाने के लिए उसकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। इसके बाद शरीर के हिस्सों को एक नीले रंग के ड्रम में भरकर उसे सीमेंट से सील कर दिया गया। इस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बड़ी आसानी से हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर निकल गए थे।
साक्ष्यों और गवाहों ने खोली साजिश की पोल
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को ही दोनों आरोपियों को दोषी करार दे दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों की गवाही पेश की और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत की सजा की मांग की। पीड़ित परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील विजय बहादुर ने बताया कि गवाहों में सौरभ के भाई बबलू, उसकी मां और उसके दोस्त शामिल थे।
सबसे अहम गवाही उन दुकानदारों की रही, जिन्होंने आरोपियों को वह नीला ड्रम, चाकू, दवाइयां, सीमेंट और रेत बेची थी, जिनका इस्तेमाल इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने में किया गया था।
बता दें कि सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को ही लंदन से मेरठ लौटा था। उसके आने के बाद 25 फरवरी को मुस्कान ने अपना जन्मदिन मनाया और 28 फरवरी को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया गया। लेकिन इसके ठीक बाद 3 मार्च को सौरभ को नशीली दवाएं देकर उसकी हत्या कर दी गई।
मेरठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल आने के बाद दोनों दोषियों को नशे की लत से छुड़ाने के लिए करीब तीन-चार महीने रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ी। जहां साहिल के परिवार वाले उससे मिलने आते रहे, वहीं मुस्कान से अब तक कोई नहीं मिला। मुस्कान ने नवंबर में जेल में ही एक बेटी को जन्म दिया है और अब वह काफी धार्मिक हो गई है और अपनी बच्ची से मिलने की इच्छा जताती है।