मेरठ के असलम खान: 50 सालों से गढ़ रहे रावण का रूप, अमिताभ बच्चन से है खास कनेक्शन

दशहरा का त्योहार हो और रावण का पुतला न हो, ऐसा मुमकिन नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेरठ में एक ऐसा कलाकार है जो पिछले पांच दशकों से इस परंपरा को जीवित रखे हुए है? 70 वर्षीय असलम खान आज मेरठ के उन चुनिंदा शिल्पकारों में गिने जाते हैं, जिनके हाथों से बना रावण शहर की शान बढ़ाता है। असलम खान का यह सफर साल 1975 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने महज 3 से 5 रुपये की दिहाड़ी पर इस काम की शुरुआत की थी।
वक्त बदला और असलम खान की मेहनत रंग लाई। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कला में महारत हासिल की और खुद की वर्कशॉप स्थापित की। जो काम चंद रुपयों से शुरू हुआ था, आज वह लाखों के कॉन्ट्रैक्ट्स में बदल चुका है। उनके द्वारा बनाए गए पुतलों की कीमत अब 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। असलम खान के पुतलों की एक खास पहचान है—उनकी घुमावदार और स्टाइलिश मूंछें। जब उनसे इस अनोखे अंदाज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि यह स्टाइल उन्हें फिल्म 'शराबी' में अमिताभ बच्चन के किरदार से प्रेरित होकर मिला था।
कर्फ्यू के बीच भी नहीं रुका काम
असलम खान का यह सफर सिर्फ कामयाबी की कहानी नहीं, बल्कि उनके जुनून और जज्बे की मिसाल भी है। उन्होंने साल 1982 के मेरठ कर्फ्यू के दौरान एक ऐसा अनुभव साझा किया जो आज भी यादगार है। उस समय शहर में भारी तनाव था और आवाजाही पर पाबंदी थी, लेकिन रामलीला के आयोजकों को असलम खान के काम की जरूरत थी। स्थिति यह थी कि आयोजकों ने सेना से विशेष तालमेल किया ताकि असलम खान सुरक्षित रूप से पुतले बनाने वाली जगह तक पहुंच सकें और अपना काम पूरा कर सकें।
साल 2026 के दशहरा उत्सव के दौरान भी असलम खान अपनी इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मेरठ और आगरा जैसे शहरों में पुलिस, ट्रैफिक विभाग और पीएसी (PAC) की तैनाती की गई है ताकि रावण दहन के दौरान कोई अप्रिय घटना न घटे। इन तमाम सुरक्षा इंतजामों और बदलावों के बीच, असलम खान आज भी अपनी कला के जरिए मेरठ की सांस्कृतिक परंपरा को सहेज कर रखे हुए हैं।