कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि: मायावती ने दी श्रद्धांजलि, चुनाव की तैयारी को लेकर कड़ा निर्देश

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को पार्टी के संस्थापक और दलित आइकन मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दिन को पार्टी 'परिनिर्वाण दिवस' के रूप में मनाती है। मायावती ने लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया।
इस खास मौके पर एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मायावती ने बताया कि इस साल यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर स्थित 'बहुजन प्रेरणा केंद्र' में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है। इसका कारण वहां चल रहा रखरखाव का काम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भीड़ जुटने की स्थिति में किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके बजाय, उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से लोग लखनऊ आकर स्मारक पर श्रद्धांजलि देंगे, जबकि अन्य राज्यों में जोनल मीटिंग्स के जरिए उन्हें याद किया जाएगा।
चुनाव रणनीति और वोटर लिस्ट पर बड़ा दावा
श्रद्धांजलि के साथ-साथ मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी कमर कस ली है। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के वरिष्ठ बसपा अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें मतदाता सूची और उम्मीदवारों के चयन पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक में कुछ गंभीर मुद्दे सामने आए:
- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी: बसपा का आरोप है कि चुनाव आयोग के एसआईआर रिवीजन के बाद करीब 9 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
- वोटर जोड़ने का अभियान: मायावती ने निर्देश दिए कि गरीबों, युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्गों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जाए, ताकि उनका संवैधानिक अधिकार न छीने।
- संगठन का पुनर्गठन: पोलिंग बूथ स्तर तक समितियों के पुनर्गठन के काम को समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के दौरान मायावती ने उत्तराखंड सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केवल बड़े पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के हितों की रक्षा कर रही है, जबकि आम जनता और गरीबों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि धनबल के जरिए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसे पार्टी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाएगी।