अखिलेश यादव की हिरासत के खिलाफ मऊ में बवाल, प्रदर्शन करते सपा कार्यकर्ता हिरासत में

अखिलेश यादव की हिरासत के खिलाफ मऊ में बवाल, प्रदर्शन करते सपा कार्यकर्ता हिरासत में

उत्तर प्रदेश के मऊ में उस समय भारी तनाव फैल गया जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की दिल्ली में हुई गिरफ्तारी के विरोध में सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। मऊ में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कई सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया।

दरअसल, यह पूरा विवाद 6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में शुरू हुआ, जहां अखिलेश यादव 'INDIA' गठबंधन के एक विरोध मार्च में शामिल थे। यह मार्च संसद से चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर जा रहा था, जिसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर की गई कार्रवाई का विरोध करना था। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर इस मार्च को रोका, जिसके बाद अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।

प्रदेशभर में आक्रोश, मऊ समेत कई शहरों में प्रदर्शन

दिल्ली की इस घटना की खबर फैलते ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। मऊ में कार्यकर्ता "अखिलेश यादव जिंदाबाद" और "जय समाजवाद" के नारे लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे थे और उनकी तत्काल रिहाई की मांग कर रहे थे। मऊ के अलावा प्रयागराज, आगरा, बस्ती, उन्नाव, लखनऊ, इटावा, आजमगढ़ और बरेली जैसे शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखे गए।

प्रदर्शन की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बस्ती में प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले फूंके। वहीं आगरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं। मऊ में भी तनाव पहले से बना हुआ था, क्योंकि 5 अक्टूबर को भी सपा नेता अभिमन्यु चौहान और अन्य गठबंधन सदस्यों ने पुलिस के साथ झड़प की थी।

दिल्ली में हुए इस हंगामे में केवल सपा ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन भी हिरासत में लिए गए थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठकर अपना विरोध जताया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार करते हुए विपक्ष के इस मार्च को एक 'अवैध घुसपैठ' की कोशिश करार दिया है।

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