मऊ पुलिस की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व SPs के खिलाफ जांच के आदेश

Shubham Singh13 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मऊ पुलिस की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूर्व SPs के खिलाफ जांच के आदेश

एक 14 साल के बच्चे के लापता होने के मामले में मऊ पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि साल 2023 के बाद से मऊ जिले में तैनात रहे सभी पुलिस अधीक्षकों (SPs) के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए। यह कड़ा कदम कोर्ट ने इसलिए उठाया क्योंकि 2017 से लापता सचिन मौर्य का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पूरा मामला सितंबर 2017 का है, जब सचिन मौर्य नाम का एक किशोर अचानक गायब हो गया था। नौ साल बीत जाने के बाद भी न तो बच्चा मिला और न ही उसका कोई अवशेष। कोर्ट ने पाया कि इस अपहरण के मामले में अभियोजन पक्ष का रवैया बेहद लापरवाह रहा है। हालांकि मार्च 2023 में छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, लेकिन ट्रायल की रफ्तार इतनी धीमी रही कि 54 गवाहों में से अब तक केवल दो गवाहों के बयान दर्ज हो पाए हैं।

मानवीय जीवन का मामला, कागजी कार्रवाई नहीं: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला किसी कागजी कार्रवाई का नहीं, बल्कि एक इंसान की जिंदगी से जुड़ा है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि गवाहों को पेश करना जांच एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें मऊ पुलिस पूरी तरह विफल रही है। कोर्ट ने इसे "पूर्ण शिथिलता" करार दिया है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मऊ के तत्कालीन एसपी कमलेश बहादुर कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने हलफनामा भी दाखिल किया। इसके बाद 7 अक्टूबर 2026 को उनका तबादला पुलिस मुख्यालय में एसपी (जन शिकायत) के पद पर कर दिया गया और सर्वेश कुमार मिश्रा को मऊ का नया एसपी नियुक्त किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूर्व एसपी के खिलाफ विभागीय जांच दो हफ्ते के भीतर शुरू की जाए। साथ ही, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को 16 नवंबर 2026 तक एक व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामा जमा करना होगा, जिसमें यह विस्तार से बताया जाए कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और जांच में कितनी प्रगति हुई है।

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