मथुरा: अष्टसखी कुंड के पास 70 मकानों पर लगे लाल निशान, अब ध्वस्तीकरण का डर

मथुरा के राधाकुंड इलाके में स्थित ऐतिहासिक अष्टसखी कुंड के आसपास रहने वाले लोगों की नींद उड़ गई है। प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का संकेत देते हुए यहां 70 से ज्यादा मकानों और संपत्तियों पर लाल क्रॉस के निशान लगा दिए हैं। इन निशानों का सीधा मतलब है कि ये निर्माण अवैध हैं और जल्द ही प्रशासन का बुलडोजर इन पर चल सकता है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में भारी चिंता और डर का माहौल है।
मामले में यह बात भी सामने आई है कि कुंड के आसपास की जमीनों के कुछ हिस्सों को पश्चिम बंगाल के लोगों को बेचा गया था, जिससे विवाद और गहरा गया है। दरअसल, सरकार प्रदेश के प्राचीन जल निकायों को पुनर्जीवित करने के मिशन पर है, जिसके तहत अष्टसखी कुंड की सूरत बदली जाएगी।
12.15 करोड़ से संवरेगा कुंड, टाटा कंपनी करेगी सौंदर्यीकरण
विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह ने पुष्टि की है कि राधा कुंड, श्याम कुंड और अष्टसखी कुंड के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के लिए 12.15 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस पूरी परियोजना का उद्देश्य इन पवित्र स्थलों का नवीनीकरण करना और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि टाटा कंपनी अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत इस कार्य को पूरा करेगी।
मथुरा में अतिक्रमण के खिलाफ यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले सितंबर 2026 में राधाकुंड नगर पंचायत ने परिक्रमा मार्ग से अवैध दुकानों और अस्थायी ढांचों को हटाया था ताकि ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म किया जा सके। वहीं, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) भी उन निर्माणों पर नजर गड़ाए हुए है जिनके पास स्वीकृत नक्शे नहीं हैं।
इतना ही नहीं, जनवरी 2026 में सिंचाई विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर ड्रेनेज लैंड (निकासी भूमि) पर बने करीब 300 अवैध मकानों को चिन्हित कर उन्हें खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब अष्टसखी कुंड पर हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।