नेपाल में आई अचानक बाढ़ से महाराजगंज में अलर्ट, DM बोले- घबराने की जरूरत नहीं, स्थिति नियंत्रण में

नेपाल के गोरखा जिले में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) की खबरों के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, महाराजगंज के जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जिले में बाढ़ का कोई तत्काल खतरा नहीं है और लोग घबराएं नहीं। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
जिलाधिकारी सोगरवाल ने बताया कि नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक प्राकृतिक बांध टूट गया, जिससे सियार नदी (बुधी गंडाकी की सहायक नदी) में अचानक पानी का स्तर बढ़ गया। इसका असर नारायणी नदी की सहायक नदियों पर भी पड़ा है। चूंकि महाराजगंज नेपाल से आने वाली नारायणी नदी का एक मुख्य प्रवेश बिंदु है, इसलिए प्रशासन इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। पूर्व में भी नेपाल में आई ऐसी बाढ़ से महाराजगंज और कुशीनगर में भारी तबाही मची थी, जिसे देखते हुए इस बार विशेष सावधानी बरती जा रही है।
नदियों के जलस्तर पर पैनी नजर
DM ने स्थिति की गंभीरता को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में नदियों का जलस्तर सामान्य है। उन्होंने बताया कि वाल्मीकि बैराज पर पानी का स्तर 50,000 से 60,000 क्यूसेक के बीच है, जो कि सामान्य सीमा के भीतर है। प्रशासन आने वाले कुछ घंटों की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। यदि कोई खतरा उभरता है या नेपाल से कोई चेतावनी मिलती है, तो मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
दूसरी ओर, नेपाल के गोरखा जिले से आने वाली खबरें काफी चिंताजनक हैं। वहां बुधी गंडाकी नदी के बेसिन में आई बाढ़ के बाद रविवार सुबह से कम से कम 10 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने वहां भारी तबाही मचाई है, जिसमें दो मोटर योग्य पुलों सहित कुल छह पुल बह गए हैं। अरुघाट, त्रिपुरासुंदरी और सोती-मानबू जैसे इलाकों में पुल टूटने से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महाराजगंज प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।