लखनऊ में पार्किंग विवाद ने लिया खूनी रूप, एक ही परिवार के 3 सदस्यों की हत्या के बाद भारी बवाल
लखनऊ के सादतगंज में पार्किंग विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के बाद भारी बवाल, आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का सादतगंज इलाका इस समय भारी तनाव और गुस्से की चपेट में है। महज कार पार्किंग और एक चबूतरे के निर्माण को लेकर छिड़े विवाद ने ऐसा खूनी मोड़ लिया कि एक ही परिवार के तीन सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया गया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया है।
यह पूरी वारदात नौबस्ता इलाके के ब्रह्मणी टोला में हुई। जानकारी के मुताबिक, रिटायर्ड सचिवालय कर्मचारी 62 वर्षीय शिवाजी तिवारी, उनके 55 वर्षीय भाई शंभू (शिवेंद्र) तिवारी और उनके 30 वर्षीय बेटे सुयश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सबसे दुखद पहलू यह है कि सुयश की शादी आगामी 5 दिसंबर को होने वाली थी, लेकिन खुशियों वाले घर में अब मातम पसरा है।
पार्किंग विवाद और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हत्याकांड लंबे समय से चल रहे विवाद का नतीजा था। विवाद कार पार्किंग और बरगद के पेड़ के नीचे चबूतरा बनाने को लेकर था। आरोप है कि पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर ऋषभ शुक्ला ने अवैध पिस्टल से फायरिंग कर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मौके से ही ऋषभ को पिस्टल और चार खाली कारतूसों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में ऋषभ की बहनें प्रीति, अदिति और दिव्या, उसके पिता दिनेश शुक्ला और चाचा राजेश व गिरीश शुक्ला भी शामिल हैं। पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सादतगंज स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) और स्थानीय चौकी प्रभारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, शिवाजी और सुयश तिवारी के सिर, छाती और पेट में गोलियों के निशान पाए गए हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी अब आरोपियों के लिए फांसी की सजा, उनकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाने और एनकाउंटर की मांग कर रहे हैं। साथ ही, पीड़ित परिवार की बेटी के लिए सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी उठाई गई है। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।