लखनऊ: 68500 शिक्षक भर्ती प्रदर्शन के बीच अभ्यर्थियों ने अनोखे अंदाज में मनाया करवा चौथ
लखनऊ के इको गार्डन में 68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर हैं, जहां उन्होंने अनोखे तरीके से करवा चौथ मनाया।

राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर डटे 68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने इस बार करवा चौथ का त्योहार बेहद अलग और विरोधपूर्ण तरीके से मनाया। भूख हड़ताल और प्रदर्शन के तीसरे दिन, यहां मौजूद अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा को त्योहार के साथ जोड़ दिया। विवाहित महिला अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन स्थल से ही वीडियो कॉल के जरिए अपने परिवार के साथ इस पर्व में शिरकत की, लेकिन उनकी आंखों में अपने हक की लड़ाई का दर्द साफ झलक रहा था।
विरोध का तरीका इतना अनोखा था कि अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की तस्वीरों और अपने आधिकारिक ज्ञापनों (memoranda) को सामने रखकर अनुष्ठान किए। यह प्रदर्शन 2018 की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने के लिए किया जा रहा है। बता दें कि ये अभ्यर्थी पहले भी इसी जगह पर नवरात्रि और दशहरा जैसे त्योहार मना चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि वे अपनी मांगों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
भूख हड़ताल का असर: दो अभ्यर्थी अस्पताल में भर्ती
लगातार जारी इस आंदोलन और भूख हड़ताल का असर अब प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। 29 अक्टूबर को चित्रकूट के दीपक पटेल और बरेली के नसीम फरीदी की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल दोनों की हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि ओबीसी (OBC) उम्मीदवारों को 27% आरक्षण और 5% की छूट का लाभ नहीं दिया गया, जिससे उन्हें अनारक्षित श्रेणी के समान माना गया। इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों ने सिफारिश की थी कि 150 में से 60 अंक (40%) प्राप्त करने वाले ओबीसी उम्मीदवारों को योग्य घोषित किया जाए।
अभ्यर्थियों ने पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात की थी, जहां उन्हें आश्वासन तो मिला लेकिन समाधान नहीं निकला। हालांकि सरकार का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद योग्यता मानदंडों को बदलना कानूनी रूप से संभव नहीं है, वहीं राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण अधिनियमों के उल्लंघन के लिए अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। अब अभ्यर्थियों की बस एक ही गुहार है कि दिवाली से पहले उनकी समस्या सुलझ जाए ताकि वे अपने परिवार के पास लौट सकें।