लखनऊ में सपा का 'पोस्टर वॉर' तेज, अखिलेश यादव के नए पोस्टर से मचा सियासी हड़कंप
लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ 'पोस्टर वॉर' तेज कर दिया है। अखिलेश यादव के नए पोस्टर में PDA सरकार का दावा किया गया है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच 'पोस्टर वॉर' अब और भी आक्रामक हो गया है। 25 अक्टूबर 2026 को सपा मुख्यालय के बाहर एक ऐसा पोस्टर लगाया गया, जिसने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। इस पोस्टर के जरिए सपा ने अपनी सामाजिक इंजीनियरिंग का एक बड़ा दांव खेला है।
इस नए पोस्टर में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक नाव पर सवार दिखाया गया है। पोस्टर पर लिखा है, 'ब्राह्मण रास्ता दिखाएंगे, केवट पार लगाएंगे और मिलकर बनाएंगे PDA सरकार।' यह नारा सीधे तौर पर रामायण के उस प्रसंग की याद दिलाता है जब केवट ने भगवान राम और लक्ष्मण को गंगा पार कराई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा इस सांस्कृतिक संदर्भ के जरिए उन समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के मजबूत वोट बैंक रहे हैं।
PDA गठबंधन को विस्तार देने की तैयारी
सपा का यह कदम केवल एक पोस्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 2027 के चुनाव के लिए एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी अपने 'PDA' (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) गठबंधन के दायरे को और बढ़ाना चाहती है। पोस्टर में 'पंडित' शब्द का इस्तेमाल कर उन ब्राह्मणों को जोड़ा जा रहा है जो खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, वहीं केवट, निषाद और मल्लाह जैसे नदी तट पर रहने वाले समुदायों को सीधा संदेश दिया गया है। सपा का लक्ष्य गंगा बेल्ट में भाजपा के प्रभाव को कम करना है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से लखनऊ की सड़कों पर होर्डिंग्स के जरिए जुबानी जंग जारी है। इससे पहले 23 अक्टूबर को अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए कुछ पोस्टर लगाए गए थे, जिनमें कथित गैंगस्टरों की तस्वीरें थीं। वहीं, 18 अक्टूबर को भी सपा नेताओं को रावण के रूप में चित्रित करने वाले पोस्टर सामने आए थे। अब अखिलेश यादव की पार्टी ने पलटवार करते हुए इस 'पोस्टर वॉर' को एक नई दिशा दे दी है।