डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर लखनऊ पुलिस का बड़ा प्रहार, अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का भंडाफोड़
लखनऊ पुलिस ने 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज का भंडाफोड़ कर सिम बॉक्स और हाई-टेक उपकरण जब्त किए हैं।

लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। 'ऑपरेशन डिजिटल कवच' के तहत पुलिस ने शहर में चल रहे एक अवैध टेलीकॉम नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसका इस्तेमाल लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ठगने और डराने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में हाई-टेक उपकरण और सिम बॉक्स बरामद किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई शहर के चार अलग-अलग इलाकों—सुशांत गोल्फ सिटी, पारा, बीबीडी और चिनहट में एक साथ की गई। इन ठिकानों से पुलिस ने 192 सिम स्लॉट वाले 6 अवैध सिम बॉक्स, 3 वीपीएन गेटवे, 21 स्मार्ट स्विच और 3 स्मार्ट हब जब्त किए हैं। इसके अलावा, मौके से 4 यूपीएस, 18 बैटरी, एक लॉक टैबलेट, वाई-फाई राउटर और सुरक्षा कैमरे भी बरामद हुए हैं।
कैसे काम करता था यह जालसाजी का नेटवर्क?
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस सेटअप का इस्तेमाल टेलीकॉम गेटवे को चकमा देने के लिए किया जा रहा था। साइबर अपराधी अंतरराष्ट्रीय वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) कॉल्स को स्थानीय मोबाइल कॉल्स के रूप में रूट करते थे, ताकि कॉल करने वाले की असली पहचान छिपी रहे। इसी तकनीक के जरिए वे अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलते थे।
साइबर पुलिस स्टेशन में इस मामले की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जब्त किए गए सभी हार्डवेयर को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अब उन मुख्य हैंडलर्स और इस नेटवर्क से फायदा उठाने वाले मास्टरमाइंड्स की तलाश में जुटी है, जो पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को नियंत्रित कर रहे थे।
गौरतलब है कि लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस हाल ही में एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा कर चुकी है। 30 अगस्त को यशराज बाजपेयी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था, जिसने बिट्स पिलाणी में एडमिशन दिलाने के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से करीब 46 लाख रुपये ठगे थे। आरोपी को लखनऊ एयरपोर्ट से तब पकड़ा गया जब वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।