लखनऊ: जिला कोर्ट के पास चला नगर निगम का बुलडोजर, 100 अवैध चैंबर जमींदोज
लखनऊ नगर निगम ने जिला कोर्ट के पास भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 100 अवैध चैंबर गिराए, वकीलों ने किया जोरदार विरोध।

राजधानी लखनऊ के कैसरबाग इलाके में जिला कोर्ट के पास शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लखनऊ नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंची। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश का पालन करते हुए निगम ने सार्वजनिक जमीन पर बने करीब 100 अवैध चैंबरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी तनाव देखा गया और वकीलों ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
जानकारी के मुताबिक, एक जनहित याचिका (PIL) के बाद हुए सर्वे में कुल 241 अवैध निर्माणों की पहचान की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सड़कों, फुटपाथों और नालों पर किए गए अतिक्रमण को पांच हफ्ते के भीतर हटाया जाए। इसी आदेश के तहत नगर निगम ने यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। पहले दिन 100 ढांचों को गिराया गया, जबकि बाकी 125 चैंबरों पर अगली सुनवाई के बाद फैसला लिया जाएगा।
वकीलों का भारी विरोध और पुलिस का पहरा
जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, वहां मौजूद वकीलों ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ वकील बुलडोजर के सामने लेट गए और कुछ मशीनरी पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना था कि ये चैंबर उनकी आजीविका का एकमात्र साधन हैं और प्रशासन को करीब 800 प्रभावित वकीलों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि पास में स्थित शराब की दुकान को क्यों नहीं हटाया जा रहा है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्रवाई के दौरान ACP, ADCP और नौ थाना प्रभारियों के साथ करीब 200 से 250 पुलिसकर्मी और PAC की डेढ़ कंपनी तैनात रही।
नगर निगम के जोनल ऑफिसर ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि कार्रवाई से पहले सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे और दस्तावेज पेश करने का मौका दिया गया था। इस दौरान 14 आपत्तियों का निपटारा भी किया गया। इस ऑपरेशन में 10 जेसीबी, एक पोकलेन, 10 हाइवा ट्रक और रोड ब्रेकर जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले 17 मई और 30 अगस्त 2026 को भी ऐसी कार्रवाई की गई थी, जिसमें 72 ढांचे गिराए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें फिर से बना लिया गया था। अब नाराज वकील इस मामले को 25 मई 2027 को होने वाली अगली कोर्ट सुनवाई में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।