लखनऊ के पांडेयगंज में बनेगा भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन, इंजीनियरिंग का नमूना होगा यह प्रोजेक्ट
लखनऊ की परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) एक ऐसा प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है, जो न केवल शहर की रफ्तार बढ़ाएगा बल्कि भारत में एक नया रिकॉर्ड भी बनाएगा। लखनऊ के पांडेयगंज इलाके में भारत का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन बनाया जा रहा है, जो जमीन से करीब 35 से 38 मीटर की गहराई में स्थित होगा। यह स्टेशन वर्तमान में हावड़ा मेट्रो स्टेशन के 33 मीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा।
इस स्टेशन की सबसे बड़ी चुनौती और खासियत यह है कि कि पांडेयगंज इलाके में जगह की भारी कमी है। इस वजह से स्टेशन को पारंपरिक तरीके से बजाय पांच मंजिला ढांचे में तैयार किया जाएगा। यहाँ ट्रेनें एक-दूसरे के साथ चलने के बजाय एक के ऊपर एक (स्टैक्ड अरेंजमेंट) चलेंगी। ऊपरी ट्रैक 22.2 मीटर की गहराई पर होगा, जबकि निचला ट्रैक 33.9 मीटर की गहराई पर होगा। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेशन 14 मीटर चौड़ा और 130 मीटर लंबा होगा।
ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का हिस्सा है यह प्रोजेक्ट
यह स्टेशन लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1B) का हिस्सा है, जो चारबाग से वसंत कुंज तक के सफर को आसान बनाएगा। इस कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन होंगे, जिनमें से 5 एलिवेटेड और 7 अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे। एलिवेटेड स्टेशनों में ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मुसाबाग और वसंत कुंज शामिल हैं, जबकि अंडरग्राउंड स्टेशनों में चारबाग, गौतम बुद्ध नगर, अमीनाबाद, पांडेयगंज, सिटी रेलवे स्टेशन, मेडिकल चौराहा और चौक चौराहा शामिल हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5,801 करोड़ रुपये है। चारबाग से चौक तक के 6.52 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन के लिए अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जिसने 1,632 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाई थी। इस टेंडर प्रक्रिया में एलएंडटी और टाटा प्रोजेक्ट्स जैसी बड़ी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया था।
UPMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर सुशील कुमार ने बताया कि पांडेयगंज स्टेशन इस कॉरिडोर का सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेशन होगा। इसकी वजह यह एक तरफ तो सड़क की चौड़ाई केवल 16 से 17 मीटर है, और दूसरी तरफ यहाँ ब्रिटिश काल का एक ईंटों वाला ड्रेन (ब्रिक-बैरल ड्रेन) मौजूद है। इस पूरे प्रोजेक्ट को लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी होने के बाद तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। एलिवेटेड सेक्शन का काम 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला है, जबकि अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम अक्टूबर के भीतर ही शुरू होने की उम्मीद है।