लखीमपुर खीरी: घर के आंगन से मासूम को उठा ले गया तेंदुआ, बच्चे की मौत से मचा कोहराम

Shubham Singh15 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
लखीमपुर खीरी: घर के आंगन से मासूम को उठा ले गया तेंदुआ, बच्चे की मौत से मचा कोहराम

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में वन्यजीवों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहाँ एक बार फिर एक खौफनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक तेंदुए ने 6 साल के मासूम बच्चे को अपना शिकार बना लिया। यह दर्दनाक हादसा निघासन थाना क्षेत्र के नौरंगबाद फार्म इलाके में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को हुआ, जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक, नवजोत (मनजोत) सिंह नाम का 6 साल का बच्चा अपने पिता जोगा सिंह और भाइयों के साथ खेतों से वापस लौट रहा था। जैसे ही वे घर पहुंचे और बच्चा आंगन में था, तभी घात लगाकर बैठे तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया और बच्चे को अपने जबड़ों में दबाकर जंगल की ओर खींच ले गया। पिता ने अपने कलेजे के टुकड़े को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तेंदुआ बेहद फुर्तीला था और वह बच्चे को लेकर ओझल हो गया। काफी खोजबीन के बाद, करीब 500 मीटर दूर जंगल में बच्चे का क्षत-विक्षत शव मिला।

इलाके में दहशत, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

यह कोई पहली घटना नहीं है; लखीमपुर खीरी में तेंदुए का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे ठीक दो दिन पहले, 12 अक्टूबर को धौरहरा वन क्षेत्र के बोझिया गांव में 7 साल की सान्या नाम की बच्ची को भी तेंदुआ उठा ले गया था, जिसका शव अगले दिन गन्ने के खेत से बरामद हुआ था। इन लगातार हो रहे हमलों ने ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की टीम घटनाओं की सूचना मिलने के काफी देर बाद मौके पर पहुंचती है, जिससे समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती।

धौरहरा रेंज ऑफिसर अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। वन विभाग ने इलाके में दो पिंजरे लगाए हैं और निगरानी के लिए कैमरों के साथ-साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अब तक यह खूंखार जानवर गिरफ्त से बाहर है।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष पुराना है। सितंबर 2024 में जडाउरा गांव में 35 दिनों के भीतर चार लोगों की जान गई थी। वर्तमान में ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनके बच्चों और परिवारों की सुरक्षा के लिए कड़े और ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों।

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