ललितपुर: चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड का प्रदर्शन, फूंका पुतला

उत्तर प्रदेश के ललितपुर में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। जिला अध्यक्ष हृदयेष यादव मुखिया के नेतृत्व में यह प्रदर्शन 7 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने रानी अवंती बाई लोधी प्रांगण से अंबेडकर पार्क तक मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उन्होंने 'वोट चोरी' और मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों जैसे गंभीर दावे करते हुए मांग की कि भारत निर्वाचन आयोग के भीतर जवाबदेही तय करने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। यह आक्रोश केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अगले ही दिन 8 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव आयुक्त का पुतला फूंककर अपना विरोध जताया। कांग्रेस का आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर लाखों मतदाताओं को वंचित किया गया ताकि एक विशेष दल को लाभ मिल सके।
वोटर लिस्ट विवाद और राष्ट्रीय स्तर पर तनाव
यह पूरा विवाद 'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' के उन दावों के बाद गहराया है, जिसमें राज्य की मतदाता सूचियों में 16.18 लाख नामों को जोड़ने की बात कही गई थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 9 अक्टूबर को इन दावों को पूरी तरह निराधार और गलतफहमी पर आधारित बताकर खारिज कर दिया।
इस विरोध की लहर अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुकी है। 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में AISA, AISF, SFI और ASAP जैसे छात्र संगठनों के साथ-साथ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने प्रदर्शन किया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने इस दौरान दीपांकर भट्टाचार्य, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे प्रमुख चेहरों को हिरासत में ले लिया।
दूसरी ओर, इस विवाद के बीच 124 पूर्व IAS और IFS अधिकारियों ने एक खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग की 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया का समर्थन किया है। अधिकारियों का कहना है कि धांधली के किसी भी आरोप के लिए ठोस सबूत होने चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ECI-Net वेबसाइट की समीक्षा हेतु एक समिति गठित करने की घोषणा की है।