लखीमपुर खीरी धान घोटाला: हाईकोर्ट सख्त, स्पेशल सेक्रेटरी को जांच सौंपी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में धान खरीद के नाम पर हुए एक बड़े फर्जीवाड़े ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव को उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह पूरा मामला उन लोगों से धान खरीदने का है, जिनके पास वास्तव में कोई कृषि भूमि ही नहीं थी, लेकिन कागजों पर उन्हें किसान दिखाकर सरकारी धन का गबन किया गया।
इस पूरे घोटाले का खुलासा पत्रकार अनुराग मिश्रा ने किया था। उन्होंने अदालत में एक जनहित याचिका (PIL No. 973/2026) दायर की, जिसमें पुख्ता सबूत पेश किए गए कि कैसे भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर साजिश रची। आरोप है कि 2025-26 के खरीद सीजन के दौरान उन लोगों का पंजीकरण किसानों के रूप में कराया गया जिनके पास जमीन नहीं थी, जिससे असली किसानों के हक मारे गए और सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।
जांच के लिए तय की गईं कड़ी शर्तें
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह सुनिश्चित किया कि जांच निष्पक्ष हो। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस जांच का नेतृत्व स्पेशल सेक्रेटरी या उससे ऊपर के रैंक का अधिकारी करेगा। साथ ही, यह भी शर्त रखी गई है कि जांच अधिकारी वर्तमान में लखीमपुर खीरी में तैनात नहीं होना चाहिए, ताकि स्थानीय प्रभाव से बचा जा सके।
अदालत ने सरकार से मांग की है कि वह न केवल याचिका में बताए गए विशिष्ट मामलों की जांच करे, बल्कि धान खरीद की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। इस आदेश के बाद प्रदेश के खाद्य और रसद विभाग में हड़कंप मच गया है। अब सबकी नजरें 30 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब सरकार को अपना जवाब और जांच रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।