लखीमपुर खीरी: धान खरीद में धांधली का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट में PIL दाखिल

लखीमपुर खीरी: धान खरीद में धांधली का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट में PIL दाखिल

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की सरकारी खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। इस कथित घोटाले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। शाहजहाँपुर के एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अनुराग मिश्रा ने यह याचिका दाखिल की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकारी तंत्र में सेंध लगाकर फर्जी तरीके से धान की खरीद की गई है।

याचिका में यह गंभीर दावा किया गया है कि असली किसानों के जमीन के रिकॉर्ड और पंजीकरण विवरणों का गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बिचौलियों ने मिलीभगत कर असली किसानों के खातों के जरिए अन्य व्यक्तियों के नाम पर धान की खरीद की। याचिकाकर्ता ने कई उदाहरण दिए हैं, जिनमें लखीमपुर मंडी-V केंद्र पर बलजीत कौर के नाम पर 190 क्विंटल और मंडी-VII में छवि गुप्ता के नाम पर 187 क्विंटल धान की खरीद शामिल है। दावा है कि इन ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल किए गए खातों के असली मालिक कोई और थे।

इन केंद्रों पर हुई संदिग्ध खरीद

PIL में अन्य संदिग्ध मामलों का भी जिक्र है, जिनमें मंडी-II में अमित कुमार (164 क्विंटल), मंडी-IV में हरीश कुमार मिश्रा (214 क्विंटल), मंडी-VI में मनोज कुमार आर्य (100 क्विंटल), मंडी-III में आलोक गौर (232 क्विंटल), मंडी-IX में अंतराम (273 क्विंटल), मंडी-I में माजिद अली (190 क्विंटल) और मंडी-VIII में प्रज्ञा गुप्ता (192 क्विंटल) के नाम पर हुई खरीद शामिल है। याचिका के मुताबिक, इन सभी मामलों में पंजीकृत खाता नंबर और वास्तविक जमीन मालिकों के नाम मेल नहीं खाते हैं।

इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता ने IGRS पोर्टल पर की गई शिकायतों के निपटारे पर भी सवाल उठाए हैं। अनुराग मिश्रा का आरोप है कि उन्होंने मार्च और अप्रैल के महीनों में जिला मजिस्ट्रेट और मुख्यमंत्री कार्यालय को सबूत सौंपे थे, लेकिन क्षेत्रीय विपणन अधिकारी (RMO) के कार्यालय ने बिना किसी ठोस कार्रवाई के, गलत डेटा के आधार पर इन शिकायतों को बंद कर दिया।

अधिवक्ता अवधेश चंद्र द्विवेदी और सौरभ कुमार मिश्रा द्वारा प्रतिनिधित्व की गई इस याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की एक समयबद्ध और स्वतंत्र जांच कराई जाए। याचिका में राज्य के खजाने को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन करने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और गबन की गई राशि की वसूली करने की अपील की गई है।

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