KGMU में धार्मिक धर्मांतरण और शोषण का मामला: 12 डॉक्टरों और स्टाफ पर होगी बड़ी कार्रवाई
लखनऊ के KGMU में धार्मिक धर्मांतरण और शोषण के गंभीर आरोपों के बाद STF की रिपोर्ट आई है। अब 12 डॉक्टरों और स्टाफ पर बड़ी कार्रवाई होगी।

लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद अब यूनिवर्सिटी प्रशासन 12 डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह पूरा मामला केवल धार्मिक धर्मांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, जिसने चिकित्सा जगत को हिला कर रख दिया है।
करीब 10 महीनों तक चली STF की गहन जांच में इन गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 30 अक्टूबर, 2026 को KGMU के रजिस्ट्रार को एक औपचारिक निर्देश जारी किया है। इस निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि STF रिपोर्ट में नामजद सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
इन विभागों के कर्मचारी हैं रडार पर
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभागों के साथ-साथ गांधी वार्ड में तैनात कर्मचारी शामिल हैं। जांच में यह बात भी सामने आई है कि कुछ वरिष्ठ संकायों और प्रशासनिक अधिकारियों ने शिकायतों को दबाने और आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी। गौरतलब है कि जनवरी 2026 में पैथोलॉजी विभाग के एक रेजिडेंट डॉक्टर को इसी तरह के कदाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने 6 नवंबर, 2026 को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में तय किया जाएगा कि आरोपियों के खिलाफ कौन सी प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह KGMU अधिनियम 2002 और KGMU संविधि 2011 के तहत कार्यवाही शुरू करे। इसके लिए जल्द ही विभागीय जांच समितियां गठित की जाएंगी, जो अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेंगी। अब सबकी नजरें कार्यकारी परिषद की बैठक पर टिकी हैं कि इन सफेदपोशों पर यूनिवर्सिटी प्रशासन क्या एक्शन लेता है।