KGMU लखनऊ: STF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, धर्मांतरण और शोषण का संगठित खेल

लखनऊ के KGMU में संगठित धर्मांतरण और यौन शोषण का मामला सामने आया है। STF की रिपोर्ट के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

Sushant Singh2 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
KGMU लखनऊ: STF की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, धर्मांतरण और शोषण का संगठित खेल

राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा जगत और प्रशासन दोनों को हिलाकर रख दिया है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपनी दस महीने लंबी जांच के बाद राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें अस्पताल के भीतर संगठित तरीके से धार्मिक धर्मांतरण और गंभीर शोषण की बात कही गई है।

STF की इस रिपोर्ट के मुताबिक, KGMU के पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड जैसे महत्वपूर्ण विभागों में यह सब चल रहा था। जांच में पाया गया कि करीब 13 लोग, जिनमें वरिष्ठ डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ शामिल थे, इस पूरे खेल में लिप्त थे। आरोप है कि इन लोगों ने न केवल महिला कर्मचारियों का यौन शोषण किया, बल्कि उन्हें ब्लैकमेल भी किया।

शादी का झांसा और प्रशासन की मिलीभगत

रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि पीड़ितों को पहले प्यार के जाल में फंसाया गया और शादी के झूठे वादे किए गए। इसके बाद उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर उनका धर्म परिवर्तन कराने के लिए मजबूर किया गया। इस पूरे मामले में नर्सिंग स्टाफ के नफीस और फुरकान के साथ-साथ डॉ. रिजवान के नाम भी सामने आए हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि STF ने KGMU प्रशासन पर लापरवाही और मिलीभगत का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी अधिकारियों को इन शिकायतों की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय सबूतों को दबाने और आरोपियों को बचाने की कोशिश की। बता दें कि इस पूरे विवाद की शुरुआत दिसंबर 2025 में डॉ. रमीज और अन्य के खिलाफ सामने आई शिकायतों से हुई थी।

इस खुलासे के बाद राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। 30 अक्टूबर 2026 को KGMU रजिस्ट्रार को एक औपचारिक निर्देश जारी कर सभी चिन्हित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। सरकार ने इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) मांगी है।

अब KGMU प्रशासन ने इन दावों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति बनाने का निर्णय लिया है। इस पूरे संकट से निपटने और आगे की रणनीति तय करने के लिए 6 नवंबर 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है।

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