बाराबंकी की धनोखर झील पर गूंजा केवट संवाद, नाव नैया लीला ने मोहा मन

Shubham Singh12 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
बाराबंकी की धनोखर झील पर गूंजा केवट संवाद, नाव नैया लीला ने मोहा मन

बाराबंकी की प्रसिद्ध धनोखर झील के तट पर भक्ति और कला का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। यहाँ बाराबंकी धनोखर झील केवट संवाद और 'नाव नैया लीला' का बेहद जीवंत मंचन किया गया। इस कार्यक्रम में भगवान श्री राम और केवट के बीच के उस निस्वार्थ प्रेम और अटूट श्रद्धा को दर्शाया गया, जिसने सदियों से भक्तों के दिलों को छुआ है। नाटक के जरिए राम और निषाद राज की ऐतिहासिक मुलाकात और वनवास के दौरान के प्रसंगों को जीवंत किया गया।

लीला की शुरुआत भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास के सफर से हुई। नाटक में दिखाया गया कि कैसे तमस नदी पार कर श्रृंगवेरपुर में निषाद राज से मिलने के बाद, जब श्री राम गंगा तट पहुंचे, तो उन्होंने केवट से नाव मांगी। यहाँ एक दिलचस्प मोड़ आया जब केवट ने तुरंत नाव चलाने से इनकार कर दिया। केवट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने सुना है कि प्रभु के चरणों की धूल में ऐसा चमत्कार है कि पत्थर भी स्त्री बन जाता है। केवट को डर था कि कहीं उसकी लकड़ी की नाव स्त्री न बन जाए, जिससे उसकी रोजी-रोटी छिन जाएगी और वह अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पाएगा।

भक्ति और आस्था का संगम

केवट की इस मासूमियत और श्रद्धा को देख भगवान राम मुस्कुरा दिए। केवट ने जिद पकड़ ली कि जब तक वह प्रभु के चरण नहीं धो लेगा, तब तक वह उन्हें नदी पार नहीं कराएगा, चाहे लक्ष्मण जी उसे बाण की चेतावनी ही क्यों न दें। उसने साफ किया कि वह कोई किराया नहीं चाहता, बल्कि केवल प्रभु के चरणों की सेवा करना चाहता है। अंततः, श्री राम ने उसकी इच्छा स्वीकार की और चरण धोने के बाद केवट ने उन्हें गंगा पार कराया। इस दृश्य को देख दर्शक भावविभोर हो गए और ऐसा लगा मानो स्वयं देवलोक से पुष्प वर्षा हो रही हो।

इस भव्य आयोजन को लखनऊ के अविनाश मधुर और उनकी टीम ने प्रस्तुत किया, जबकि जादूगर चिराग ने अपने करतबों से लोगों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गंगा आरती रही, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस पूरे आयोजन को प्रशांत सिंह, सुशील जायसवाल, दिवंगत कांजी मिश्रा के पुत्र अंश मिश्रा और रंजीत वर्मा के सहयोग से संपन्न कराया गया। नाटक में प्रशांत सिंह ने केवट की भूमिका निभाई।

इस मौके पर राम लखन श्रीवास्तव, अनिल अग्रवाल, महासचिव शिवकुमार वर्मा, लीला व्यास, पंडित प्रमोद पाठक, गुरदीप सिंह 'सिद्धू', पंडित संजय तिवारी, राजू पटेल, अमर सिंह, अंकित गुप्ता गोलू, विनय सिंह, सौरभ गुप्ता और कुणाल सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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