वोटर लिस्ट रिवीजन पर विवाद: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष के आरोपों को बताया गुमराह करने वाला

Shubham Singh12 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
वोटर लिस्ट रिवीजन पर विवाद: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष के आरोपों को बताया गुमराह करने वाला

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रयागराज में मीडिया से बात करते हुए मौर्य ने कहा कि विपक्षी दल वर्तमान में मुद्दों की कमी से जूझ रहे हैं और चुनावी सूचियों में होने वाले नियमित अपडेट के खिलाफ विरोध करके जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में संशोधन की एक तय प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि नाम हटाने, सुधार करने या नए नाम जोड़ने के लिए विशिष्ट फॉर्म का प्रावधान है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय सीधे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) या चुनाव आयोग से संपर्क करें। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष का यह पूरा विरोध दरअसल सरकार द्वारा किसानों, महिलाओं और गरीबों के लिए किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों में बाधा डालने की एक नाकाम कोशिश है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया और विपक्ष का हंगामा

भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, यह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक वैधानिक प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों या डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल पात्र मतदाता ही पंजीकृत रहें।

दूसरी ओर, 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। विपक्ष ने इसे 'वोट चोरी' का मामला बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसी दिन राहुल गांधी ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की।

इस पूरे विवाद के बीच, जस्टिस मदन बी. लोकुर के नेतृत्व में पांच पूर्व न्यायाधीशों की एक समिति बनाई गई है, जो इस प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच करेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इससे पहले अप्रैल 2026 में एक पुनरीक्षण कार्य पूरा हुआ था, जिसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के नेतृत्व में लगभग 2.05 करोड़ नाम हटाए गए थे और 84 लाख नए मतदाता जोड़े गए थे।

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