कौशाम्बी: 15 लाख की धोखाधड़ी मामले में ओडिशा के 6 लोग बरी, लापरवाह SI पर गिरेगी गाज
कौशाम्बी कोर्ट ने पुलिस की लचर जांच के कारण 15 लाख की धोखाधड़ी के आरोपी 6 ओडिशा निवासियों को बरी कर दिया। अब SI पर कार्रवाई की तैयारी है।

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी की एक अदालत ने 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाए गए ओडिशा के छह व्यक्तियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा, जिसके चलते कोर्ट ने उन्हें 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए रिहा करने का आदेश दिया।
पुलिस जांच पर कोर्ट की सख्त नाराजगी, DGP को पत्र
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पूर्व जांच अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर (SI) आलोक रंजन तिवारी के काम करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। न्यायाधीश ने पाया कि जांच में इतनी बड़ी खामियां थीं कि ट्रायल के दौरान आरोपों को पुख्ता नहीं किया जा सका।
जांच में बरती गई इस घोर लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) और कौशाम्बी के पुलिस अधीक्षक (SP) को औपचारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें सब-इंस्पेक्टर तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
अब इस फैसले के बाद इलाके में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पुलिस विभाग अपने लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा। सबूतों के अभाव में छह लोगों का बरी होना कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।