कानपुर नगर निगम में भारी सुरक्षा तैनात, मेयर और कमिश्नर के बीच ठनी
कानपुर नगर निगम में मेयर और कमिश्नर के बीच विवाद गहराया। बैठक से कमिश्नर के वॉकआउट के बाद अब मुख्यालय पर भारी सुरक्षा तैनात की गई है।

कानपुर नगर निगम विवाद के चलते अब नगर निगम मुख्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। कार्यकारी समिति की आगामी बैठक से पहले यहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह कदम 28 अक्टूबर को हुई उस गहमागहमी के बाद उठाया गया है, जिसमें नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बैठक के बीच से वॉकआउट कर दिया था।
दरअसल, मेयर प्रमिला पांडे और नगर आयुक्त के बीच पिछले छह महीनों से तनाव चल रहा है, जो अब खुलेआम टकराव में बदल चुका है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब मेयर प्रमिला पांडे अपने साथ दो वकीलों, मोहम्मद जावेद और ऋषभ अवस्थी को बैठक में लेकर आईं। आईएएस अधिकारी अर्पित उपाध्याय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि उत्तर प्रदेश नगर पालिका निगम अधिनियम 1959 के अनुसार, कार्यकारी समिति की बैठकों में केवल निर्वाचित पार्षदों और अधिकृत सरकारी अधिकारियों का ही प्रवेश मान्य है।
कानूनी दांव-पेंच और हंगामे से रुकी शहर की रफ्तार
मेयर का कहना था कि जटिल कानूनी प्रावधानों की समझ न होने के कारण उन्हें कानूनी सलाह की जरूरत है। वहीं, नगर आयुक्त इस बात पर अड़े रहे कि वे बाहरी व्यक्तियों के सवालों का जवाब नहीं देंगे और किसी भी विशेषज्ञ को बुलाने के लिए समिति की पूर्व मंजूरी अनिवार्य है। नतीजा यह हुआ कि नगर आयुक्त अपनी टीम के साथ बैठक छोड़कर बाहर चले गए और महज 15 मिनट में मीटिंग खत्म हो गई। इसके बाद पार्षदों ने नगर आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया।
इस खींचतान का सबसे बुरा असर कानपुर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। पिछले एक महीने में यह चौथी बार है जब कार्यकारी समिति की बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हुई। इस वजह से शहर के कई जरूरी काम अधर में लटके हैं, जिनमें शामिल हैं:
- घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था।
- विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी करना।
- बजट का आवंटन और नगर निगम की राजस्व रणनीतियां।
अब यह मामला और गरमाने वाला है। मेयर प्रमिला पांडे ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत राज्य सरकार और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से करने के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर, पार्षद नगर आयुक्त के खिलाफ एक औपचारिक निंदा प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। निगम के भीतर मचे इस घमासान ने शहर के शहरी विकास प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।