कानपुर: RTE एडमिशन में लापरवाही पर 22 प्राइवेट स्कूलों को DM का अल्टीमेटम, मान्यता रद्द करने की चेतावनी
कानपुर डीएम ने आरटीई के तहत एडमिशन न देने वाले 22 निजी स्कूलों को चेतावनी दी है, मान्यता रद्द करने की तैयारी।
कानपुर के निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत दाखिले को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिला मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह तंवर ने शहर के 22 निजी स्कूलों को तीन दिन का आखिरी मौका दिया है। यह कार्रवाई उन स्कूलों के खिलाफ की गई है जिन्होंने आरटीई नियमों का पालन नहीं किया और पात्र बच्चों को एडमिशन देने में लापरवाही बरती।
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को बेसिक शिक्षा विभाग के साथ हुई समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दाखिलों की समीक्षा की। आरटीई एक्ट 2009 के मुताबिक, हर निजी स्कूल को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखनी होती हैं। डीएम तंवर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी योग्य बच्चे को शिक्षा के उसके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
इन स्कूलों पर गिरी गाज, होगी कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को निर्देश दिया है कि वे पूरी प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी लंबित दाखिले तुरंत पूरे हों। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों की मोहलत के भीतर इन स्कूलों ने एडमिशन प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे, जिसमें स्कूलों की मान्यता रद्द करना भी शामिल है।
जिन स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- डॉ. वीरेंद्र स्वरूप पब्लिक स्कूल: सिविल लाइंस, कल्याणपुर और गोविंद नगर शाखाएं।
- डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर: किदवई नगर (एन-ब्लॉक और एच-ब्लॉक), श्याम नगर और जाजमऊ।
- दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS): किदवई नगर, मरदनपुर बर्रा, आजाद नगर और सर्वोदय नगर शाखाएं।
- अन्य स्कूल: एलेनहाउस पब्लिक स्कूल (खलासी लाइन और रूमा), सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल (कैंट), यूनाइटेड पब्लिक स्कूल (सिविल लाइंस), कैम्ब्रिज हाई स्कूल (सिविल लाइंस), चिंतल्स पब्लिक स्कूल (रतनलाल नगर), नर्चर इंटरनेशनल स्कूल (कल्याणपुर), वेंडी पब्लिक स्कूल (नरमऊ), एनएलके वेंडी स्कूल (खलासी लाइन) और एनएलके पब्लिक स्कूल (नवाबगंज)।
प्रशासन की इस सख्ती से अब शहर के बड़े निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि मान्यता रद्द होने का खतरा उनके लिए बड़ा संकट बन सकता है।