पश्चिमी दबदरा खत्म, भारत अब दुनिया की महाशक्ति: अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स
अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स का दावा- पश्चिमी देशों का दबदबा खत्म, भारत, चीन, रूस और अमेरिका अब दुनिया की चार बड़ी महाशक्तियां हैं।

दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में अब वह दौर नहीं रहा जब सिर्फ पश्चिमी देश ही सब कुछ तय करते थे। मशहूर अमेरिकी अर्थशास्त्री और विदेश नीति विशेषज्ञ जेफरी सैक्स ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि पश्चिमी प्रभुत्व का युग अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो चुका है। वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से जुड़ी एक चर्चा के दौरान सैक्स ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्थिरता अब एक 'मल्टीपोलर' (बहुध्रुवीय) व्यवस्था पर टिकी है, जिसमें भारत, अमेरिका, चीन और रूस दुनिया की चार मुख्य महाशक्तियों के रूप में उभरे हैं।
जेफरी सैक्स का मानना है कि अमेरिका अभी भी खुद को दुनिया का एकमात्र सर्वेसर्वा समझ रहा है, जो कि न केवल पुरानी सोच है बल्कि खतरनाक भी है। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। सैक्स के अनुसार, अमेरिका की यही जिद उसे ईरान जैसे देशों के साथ युद्ध जैसी लापरवाह और मूर्खतापूर्ण दिशा में ले जा सकती है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
पीएम मोदी और अन्य नेताओं से अमेरिका को रोकने की अपील
सैक्स ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब उभरती महाशक्तियों के नेताओं को आगे आना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन जैसे नेताओं को अमेरिकी राष्ट्रपति को यह समझाना चाहिए कि वे अपनी मनमर्जी से दुनिया में बमबारी या युद्ध नहीं थोप सकते। उनके मुताबिक, अमेरिका को अपनी सनक के बजाय दुनिया के प्रति जिम्मेदार होना होगा।
अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर प्रहार करते हुए सैक्स ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों और सैन्य संघर्षों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर किया है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि उन्होंने अपने भारतीय मित्रों को पहले ही आगाह किया था कि ट्रंप की नीतियां हानिकारक हैं और उनसे सावधान रहने की जरूरत है।
भविष्य की राह बताते हुए जेफरी सैक्स ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं:
- भारत, चीन, रूस और अमेरिका को आपसी दुश्मनी और सैन्य गठबंधनों को छोड़कर शांतिपूर्ण सहयोग करना चाहिए।
- किसी भी देश को दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- एक-दूसरे के खिलाफ गुटबाजी करने के बजाय कानून आधारित सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
अंत में, वैश्विक सद्भाव की बात करते हुए सैक्स ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को मजबूत करने की वकालत की। उन्होंने चीन और अन्य देशों से अपील की कि वे भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में छठे स्थायी सदस्य के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने तर्क दिया कि भारत का स्थायी सदस्य बनना UN को एक अधिक शक्तिशाली और प्रभावी संस्थान बनाने में मदद करेगा।