जौनपुर पुलिस ने ध्वस्त किया इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड गिरोह, 1.55 करोड़ रुपये फ्रीज

Shubham Singh13 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
जौनपुर पुलिस ने ध्वस्त किया इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड गिरोह, 1.55 करोड़ रुपये फ्रीज

उत्तर प्रदेश की जौनपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो मोबाइल फोन और व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब 1.55 करोड़ रुपये फ्रीज कराने में सफलता हासिल की है।

इस पूरे मामले की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 को हुई, जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि साइबर अपराधियों ने उनके मैनेजर का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया। इसके बाद जालसाजों ने मैनेजर बनकर पीड़ित से चैट की और उन्हें झांसे में लेकर कुल 7.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए, जिसमें से 4.5 करोड़ एक खाते में और 3 करोड़ दूसरे खाते में डाले गए।

72 घंटे के भीतर गिरफ्त में आए आरोपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में साइबर क्राइम, सर्विलांस और स्वाट (SWAT) यूनिट की एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी जांच और विभिन्न पोर्टल्स से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने महज 72 घंटों के भीतर तीन आरोपियों को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान महाराजगंज निवासी विनोद कुमार मिश्रा और कमल यादव, तथा बाराबंकी निवासी लवकेश कुमार सिंह के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन एंड्रॉइड मोबाइल फोन, एक नेपाली मोबाइल नंबर और एक चेकबुक बरामद की है। जांच के दौरान पता चला कि इन बैंक खातों के जरिए करीब 1.83 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। ये खाते उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार जैसे राज्यों में दर्ज कई शिकायतों से जुड़े हुए थे।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह गिरोह कमीशन के लालच में आम लोगों को अपने बैंक खाते खुलवाने के लिए उकसाता था, जिनका उपयोग बाद में धोखाधड़ी से मिले पैसों को इधर-उधर करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया जाता था। पुलिस अब आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है और ठगी गई राशि पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया में जुटी है।

जौनपुर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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