राम मंदिर चंदा विवाद: जयराम रमेश ने पीएम मोदी से मांगा जवाब, लगाया 'आस्था के साथ धोखे' का आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अयोध्या के श्री राम मंदिर में सार्वजनिक दान के पैसों में कथित हेराफेरी का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है। प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे से ठीक पहले जयराम रमेश ने इस मामले पर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए और इसे जनता की आस्था के साथ बड़ा विश्वासघात करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 'चंदा चोरी, आस्था धोखा' शीर्षक से एक पोस्ट साझा करते हुए रमेश ने कहा कि धार्मिक चढ़ावे के पैसों का दुरुपयोग करना एक 'गंभीर पाप' है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।
क्या है पूरा मामला और अब तक की कार्रवाई?
यह विवाद जून 2026 में तब शुरू हुआ जब मंदिर के चंदे में चोरी के आरोप सामने आए थे। इस मामले में 25 जून को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई, जिसके बाद चंदा गिनने की प्रक्रिया में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था, जिसने 17 अगस्त को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
जयराम रमेश का आरोप है कि इस रिपोर्ट के जरिए पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी गई, जिन्होंने बाद में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक अन्य SIT ने आठ आरोपियों के खिलाफ करीब 70,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इस जांच में नकदी छिपाने के 105 मामले सामने आए और 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए।
कांग्रेस का तर्क है कि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया है। रमेश ने ट्रस्ट में भाजपा, वीएचपी और आरएसएस से जुड़े लोगों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रस्ट ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 98.24 करोड़ रुपये के स्वैच्छिक योगदान की रिपोर्ट दी है और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपनी वेबसाइट पर मासिक ऑडिट रिपोर्ट प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस अब भी इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है।